TET अनिवार्यता का विरोध : चंदौली में फूंका राज्य शिक्षा मंत्री का पुतला, बोले-2029 में उखाड़ फेंकेंगे ऐसी सरकार
टीईटी अनिवार्यता पर राज्य शिक्षा मंत्री जयंत चौधरी के बयान ने उत्तर प्रदेश के शिक्षकों में आक्रोश भर दिया है। चंदौली में जिलाध्यक्ष आनंद सिंह के नेतृत्व में शिक्षकों ने पुतला दहन कर सड़क से सदन तक आंदोलन की घोषणा की है।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ जबरदस्त उबाल
राज्य शिक्षा मंत्री जयंत चौधरी का पुतला दहन
प्राथमिक शिक्षक संघ का जिला स्तरीय प्रदर्शन
सरकार के विरोधाभासी रवैये पर तीखा प्रहार
2029 के चुनावों में सबक सिखाने की चेतावनी
उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर छिड़ा विवाद अब सड़कों पर आ गया है। राज्य शिक्षा मंत्री जयंत चौधरी के हालिया बयान के बाद प्रदेश भर के प्राथमिक शिक्षकों में जबरदस्त उबाल देखा जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को चंदौली जनपद के सदर कचहरी के समीप प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और राज्य शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कर अपनी नाराजगी दर्ज कराई।
सरकार के फैसले के खिलाफ शिक्षकों का आक्रोश
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आनंद सिंह ने सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया पूरी तरह से विरोधाभासी है। एक तरफ शिक्षकों से विश्वस्तरीय शिक्षा की उम्मीद की जाती है, तो दूसरी तरफ उन्हें टीईटी जैसे नियमों में उलझाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। आनंद सिंह ने कहा, "सरकार शिक्षकों को तिल-तिल मार रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

सड़क से सदन तक आंदोलन की तैयारी
कचहरी परिसर के समीप आयोजित इस प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि जो शिक्षक वर्षों से विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन पर अचानक नई शर्तें थोपना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना अड़ियल रवैया नहीं बदला, तो यह आंदोलन केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सदन तक ले जाया जाएगा। शिक्षकों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो वे 2029 के चुनावों में सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का काम करेंगे।
पुलिस की मौजूदगी में नारेबाजी और प्रदर्शन
ब्लॉक अध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता ने संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक पूरी ईमानदारी से अपना दायित्व निभा रहे हैं, लेकिन सरकार नई नियमावली के जरिए उनकी सेवाओं को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे थे, जिन पर सरकार विरोधी नारे लिखे थे। सुरक्षा की दृष्टि से मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक शुरुआत है। यदि टीईटी अनिवार्यता संबंधी निर्णय पर जल्द पुनर्विचार नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में शिक्षण कार्य ठप कर बड़े स्तर पर असहयोग आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन में मुख्य रूप से जिला और ब्लॉक स्तर के तमाम पदाधिकारी और सैकड़ों की संख्या में प्राथमिक शिक्षक उपस्थित रहे।
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