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2000 एकड़ भूमि पर रेलवे के अतिक्रमण का खतरा! धीना में चकबंदी प्रक्रिया के खिलाफ उतरे किसान

चंदौली के धीना क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर बिना एनओसी चक निर्धारण करने का मामला गरमा गया है। किसान नेता रतन सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर इस गैरकानूनी चकबंदी प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है।

 
 

रेलवे भूमि पर चकबंदी का विरोध

एडीएम चंदौली को सौंपा ज्ञापन

बिना एनओसी काटे जा रहे चक

2000 एकड़ भूमि पर संकट

चार घंटे इंतजार के बाद मायूसी

चंदौली जिले के धीना क्षेत्र और उसके आस-पास के गांवों में इन दिनों चल रही चकबंदी की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय काश्तकारों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। किसानों का सीधा आरोप है कि चकबंदी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर रेलवे की स्वामित्व वाली भूमि में खंभे गाड़ रहे हैं। इस मनमाने ढंग से किए जा रहे चक निर्धारण के कारण भविष्य में रेलवे और किसानों के बीच बड़े कानूनी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।


बिना एनओसी चक काटने का लगा गंभीर आरोप
इस मामले को लेकर किसान नेता रतन सिंह के नेतृत्व में प्रभावित किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिलाधिकारी (एडीएम) चंदौली से मुलाकात की। किसानों ने उन्हें एक शिकायती ज्ञापन सौंपकर पूरी चकबंदी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराने और इसे तत्काल रोकने की पुरजोर मांग की है। किसानों का कहना है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (पीडीडीयू) से पटना तथा पीडीडीयू से गया रेलखंड के किनारे बसे गांवों में चकबंदी विभाग द्वारा गलत तरीके से चक काटे जा रहे हैं।

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कड़ी के आंकड़ों में हेरफेर से किसान परेशान
प्रदर्शनकारी किसानों ने तकनीकी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इन रेलखंडों के किनारे रेलवे की वास्तविक भूमि 240 से 250 कड़ी तक है। इसके विपरीत चकबंदी विभाग द्वारा केवल 140 कड़ी को 150 कड़ी दर्शाकर किसानों की निजी जमीनों का चक निर्धारण किया जा रहा है। विरोध करने पर दानापुर रेल मंडल के वरिष्ठ अभियंता ने नक्शा दिखाकर स्पष्ट किया था कि 150 कड़ी क्षेत्र में रेलवे ट्रैक व पटरी स्थित है, जबकि इसके उत्तर में 60 कड़ी और दक्षिण में 40 कड़ी रेलवे की खाली भूमि है।

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2000 एकड़ उपजाऊ भूमि पर मंडराया संकट
किसानों का आरोप है कि चकबंदी विभाग ने रेलवे प्रशासन से किसी भी प्रकार की अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए बिना ही इस पूरी रेलवे भूमि को शामिल करते हुए नए चक काट दिए हैं, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। काश्तकारों का कहना है कि इस गलत पैमाइश से जनपद के विभिन्न गांवों की लगभग 1500 से 2000 एकड़ उपजाऊ भूमि पर रेलवे द्वारा भविष्य में अतिक्रमण की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी, जिसे किसान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

चार घंटे इंतजार के बाद मायूस होकर लौटे ग्रामीण
ज्ञापन मिलने के बाद अपर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) चंदौली को मौके पर पहुंचकर सीमांकन की जांच करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद किसान कामेश्वर राय, दरोगा राय, सत्य प्रकाश राय, अनिल सिंह, विनोद यादव और मोहन राय सहित भारी संख्या में ग्रामीण लगभग चार घंटे तक अधिकारियों का इंतजार करते रहे। प्रशासनिक आश्वासन के बाद भी शाम होने तक जब कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो डटे हुए किसान मायूस होकर अपने घरों को लौट गए।

समाधान न होने पर बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
किसान नेता रतन सिंह, परमानंद सिंह, ओम प्रकाश सिंह, केसरी सिंह, बजरंगी सिंह और छोटू चौरसिया ने संयुक्त रूप से प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसानों की इस गंभीर समस्या का शीघ्र न्यायसंगत समाधान नहीं किया गया और चकबंदी की कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो क्षेत्र के समस्त ग्रामीण और किसान संगठन मिलकर एक व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए पूरी तरह बाध्य होंगे।

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