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स्टेडियम नहीं तो क्या! डिग्घी गांव बनेगा फुटबॉल की नर्सरी, 15 साल तक के बच्चे लेंगे ट्रेनिंग

चंदौली के डिग्घी गांव में खेल विभाग 'फुटबॉल नर्सरी' शुरू करने जा रहा है। यहां स्टेडियम की कमी को दूर करते हुए 15 साल तक के ग्रामीण बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की पेशेवर ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे युवाओं में भारी उत्साह है।

 
 

डिग्घी गांव में तैयार होगी बेहतरीन फुटबॉल नर्सरी

15 साल तक के बच्चों को मिलेगा पेशेवर प्रशिक्षण

स्टेडियम की कमी का खेल विभाग ने निकाला विकल्प

ड्रिबलिंग, पासिंग और फुटबॉल की बारीकियां सीखेंगे युवा

ग्रामीण क्षेत्र के होनहार खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा मंच

 चंदौली जिला आने वाले दिनों में खेल की दुनिया में अपनी एक नई और विशिष्ट पहचान बनाने जा रहा है। ग्रामीण अंचल के होनहारों को एक नया आसमान देने के लिए खेल विभाग की ओर से एक अनोखी और बेहद सराहनीय पहल की जा रही है। सकलडीहा विकास खंड के डिग्घी गांव में खेल विभाग की ओर से 'फुटबॉल नर्सरी' तैयार की जाएगी। इस नर्सरी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और युवाओं को फुटबॉल खेल की वैश्विक बारीकियों से रूबरू कराया जाएगा, ताकि वे भविष्य में जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।

खेल स्टेडियम की कमी का व्यावहारिक समाधान
चंदौली जिले में लंबे समय से एक सर्वसुविधाजनक खेल स्टेडियम की कमी खलती रही है। खेल विभाग ने इस ढांचागत कमी को खिलाड़ियों के सपनों के आड़े नहीं आने दिया और इसका एक शानदार व्यावहारिक समाधान ढूंढ निकाला है। खिलाड़ियों का उत्साह और अभ्यास निरंतर बना रहे, इसके लिए विभाग जिले के अलग-अलग ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में मौजूद खेल मैदानों को चिह्नित कर रहा है। इसी कड़ी में डिग्घी गांव के ही एक स्थानीय विद्यालय के खेल मैदान का चयन किया गया है, जहां खिलाड़ियों को प्रोफेशनल (पेशेवर) तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा।

जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने की मुहिम
प्रभारी जिला खेल अधिकारी इरशाद अहमद ने बताया कि इस फुटबॉल नर्सरी को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य ग्रासरूट लेवल (जमीनी स्तर) पर छिपी खेल प्रतिभाओं को बाहर लाना है। इस नर्सरी में विशेष रूप से 15 साल तक की उम्र के बच्चों पर फोकस किया जाएगा। यहां बच्चों को फुटबॉल के बुनियादी नियमों, उन्नत शारीरिक तकनीकों, ड्रिबलिंग, स्पीड कंट्रोल और पासिंग जैसी महत्वपूर्ण विधाओं का कड़ा अभ्यास कराया जाएगा। इस बेहतरीन पहल से न सिर्फ डिग्घी गांव बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के युवाओं को अपनी खेल प्रतिभा को निखारने का एक बेहतरीन और व्यवस्थित मंच मिलेगा।

स्थानीय उभरते खिलाड़ियों में भारी उत्साह
इस प्रशिक्षण शिविर और आगामी फुटबॉल नर्सरी को लेकर स्थानीय युवाओं और बच्चों में गजब का जोश देखा जा रहा है। खेल को लेकर अपने अनुभव साझा करते हुए गांव के ही एक खिलाड़ी ने बताया, "पहले हम मार्गदर्शन की कमी के कारण केवल क्रिकेट या वॉलीबॉल ही खेलते थे। अब जब से कोच ने हमें ट्रेनिंग देनी शुरू की है, हमारा रुझान फुटबॉल की तरफ तेजी से बढ़ा है।"

वहीं एक अन्य उभरते खिलाड़ी ने अपना अनुभव बताते हुए कहा, "शुरुआत में मुझे लगता था कि फुटबॉल केवल गेंद को पैर से किक मारना है, लेकिन यहां आकर समझ आया कि यह दिमाग और पैरों के सटीक तालमेल का बेहद खूबसूरत खेल है।" खिलाड़ियों का कहना है कि पहले सुविधाएं न होने से अभ्यास के लिए बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब महेंद्र टेक्निकल के मैदान और स्थानीय स्तर पर मिल रही प्रोफेशनल ट्रेनिंग से पूरा माहौल बदल गया है। युवाओं की मांग है कि जिले में भविष्य में फुटबॉल की और भी अधिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं।

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