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चंदौली में जिला कारागार के लिए भूमि अधिग्रहण का भारी विरोध, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, आंदोलन की चेतावनी

चंदौली के सकलडीहा क्षेत्र के तीन गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि उपजाऊ जमीन पर जिला कारागार बनने से वे बेघर और बेरोजगार हो जाएंगे।

 
 

सकलडीहा के तीन गांवों का प्रदर्शन

63 एकड़ उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण

ग्रामीणों के सामने आजीविका का संकट

आमरण अनशन और बड़े आंदोलन की चेतावनी

जेल बनने से जलभराव का खतरा

चंदौली जनपद के सकलडीहा तहसील क्षेत्र के किसानों ने जिला कारागार के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को सेवखर खुर्द, राउतपुर और सेवखर कला गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा और मांग की कि उपजाऊ भूमि पर प्रस्तावित जेल के निर्माण को तत्काल रोका जाए।

63 एकड़ उपजाऊ भूमि पर संकट
ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया कि सेवखर गांव के मौजा में जिला कारागार के लिए लगभग 63 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। किसानों का कहना है कि यह जमीन बेहद उपजाऊ है और इसी पर खेती करके तीन गांवों के छोटे किसानों के परिवारों का भरण-पोषण होता है। यदि इस भूमि का अधिग्रहण किया जाता है, तो सैकड़ों किसान पूरी तरह भूमिहीन हो जाएंगे, जिससे उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

जलभराव और विस्थापन का डर
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि भौगोलिक समस्याओं की ओर भी प्रशासन का ध्यान खींचा। ग्रामीणों की आशंका है कि गांव के पास विशाल कारागार का निर्माण होने से क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी। इससे भविष्य में गांव के रिहायशी इलाकों में बाढ़ और जलभराव का खतरा पैदा होगा, जो ग्रामीणों के अस्तित्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

अनुपजाऊ भूमि पर जेल बनाने की मांग
किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी उपजाऊ जमीन को छीनना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि जिला कारागार के लिए किसी अन्य अनुपजाऊ या बंजर क्षेत्र में जमीन चिन्हित की जाए, ताकि किसानों की रोजी-रोटी सुरक्षित रहे।

आमरण अनशन की दी चेतावनी
जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों का रुख काफी कड़ा नजर आया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन और सरकार ने भूमि अधिग्रहण का फैसला वापस नहीं लिया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि अपनी जमीन बचाने के लिए वे संगठित होकर आमरण अनशन और बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।

इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से प्रमोद यादव, इंद्रबली, संतोष यादव, बद्री सिंह, उमाशंकर सिंह, रामकृत यादव, बब्बन राम, राजेंद्र प्रसाद गोंड, सुभाष शर्मा और रामा यादव सहित सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष ग्रामीण उपस्थित रहे।

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