माता-पिता और बुजुर्गों की देखभाल अब कानूनी जिम्मेदारी: चंदौली में 'जागृति योजना' के तहत वृद्धजनों को दी गई बड़ी जानकारी
चंदौली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव निकिता गौड़ ने 'जागृति योजना 2025' के तहत वृद्धाश्रम में विधिक जागरूकता शिविर लगाया। उन्होंने बुजुर्गों को उनके कानूनी अधिकारों, भरण-पोषण भत्ते और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े कड़े नियमों की जानकारी दी।
चंदौली जिला जज दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी के निर्देश पर लगा विधिक शिविर
सचिव निकिता गौड़ ने वृद्धाश्रम में बुजुर्गों से की सीधी बात
'जागृति योजना 2025' के तहत वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर चर्चा
बच्चों और उत्तराधिकारियों के लिए माता-पिता की देखभाल करना कानूनी रूप से जरूरी
सभी तहसीलों में पीएलवी (PLV) के माध्यम से चलाया गया जागरूकता अभियान
चंदौली जिले में बुजुर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन देने के लिए एक खास मुहिम चलाई गई। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के दिशा-निर्देश पर और जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में सोमवार, 15 जून 2026 को एक विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। 'जागृति योजना 2025' के तहत जून महीने में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, सशक्तिकरण और उनकी गरिमा को लेकर यह अभियान चलाया जा रहा है।

सचिवा महोदया खुद पहुंचीं वृद्धाश्रम
इस अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चंदौली की पूर्णकालिक सचिव श्रीमती निकिता गौड़ खुद वृद्धाश्रम पहुंचीं। इसके साथ ही जिले की सभी तहसीलों में पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLV) और संस्था के पदाधिकारियों की मदद से विधिक साक्षरता शिविर लगाए गए। इस दौरान सचिव निकिता गौड़ ने वहां रह रहे बुजुर्गों से मुलाकात की और उनके कल्याण व सुरक्षा से जुड़ी कानूनी जानकारियों को बेहद सरल भाषा में साझा किया।
माता-पिता की सेवा करना अब कानूनी फर्ज
शिविर में उपस्थित वृद्धजनों को संबोधित करते हुए सचिव निकिता गौड़ ने कहा कि कानून के मुताबिक अब बच्चों और उत्तराधिकारियों के लिए अपने माता-पिता और घर के बुजुर्गों की देखभाल करना अनिवार्य है, यह उनकी कानूनी जिम्मेदारी है। यह कानून वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक कल्याण और पूरी सुरक्षा देता है। इसके तहत अगर बच्चे अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ते हैं, तो माता-पिता को कानूनी रूप से मासिक गुजारा भत्ता (भरण-पोषण भत्ता) दिलवाने का नियम है। साथ ही उनकी संपत्ति की सुरक्षा की पूरी गारंटी भी कानून देता है।
अधिकारों की जानकारी न होने से परेशान हैं बुजुर्ग
सचिव महोदया ने आगे बताया कि ढलती उम्र में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए भारत सरकार ने कई बेहतरीन नीतियां और योजनाएं बनाई हैं। सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर की योजनाओं को देश में लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि कानून में वरिष्ठ नागरिकों की जान-माल की हिफाजत, बेहतर इलाज की सुविधा और हर जिले में वृद्ध आश्रम बनाने का नियम है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि पूरी जानकारी न होने और जमीनी स्तर पर ठीक से नियम लागू न होने के कारण आज भी बहुत से बुजुर्ग इन सरकारी फायदों और अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।
सरकार और प्रशासन बुजुर्गों के साथ
विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य यही है कि समाज के आखिरी पायदान पर खड़े बुजुर्ग तक कानून की सही जानकारी पहुंचे ताकि वे अपनी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठा सकें। सरकार बुजुर्गों के बेहतर स्वास्थ्य और आश्रय के लिए लगातार काम कर रही है। इस विशेष शिविर में वृद्धाश्रम के पदाधिकारियों और भारी संख्या में पीएलवी (PLV) ने मौजूद रहकर बुजुर्गों की समस्याएं सुनीं और उन्हें कानूनी रूप से हर संभव मदद का भरोसा दिया।
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