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मनरेगा काउ शेड योजना में घालमेल, परखिए कौन बोल रहा है सच, कौन बोल रहा झूठ
चंदौली जिले में अफसरों व लाभार्थियों की आपसी खींचतान के साथ साथ एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगाते रहने के कारण मनरेगा काउ शेड योजना शासन की मंशा के अनुरुप परवान नहीं चढ़ पा रही।
 

मनरेगा काउ शेड योजना
अफसरों ने रोक दी किस्त
नहीं लग रहे हैं जानकारी वाले बोर्ड


 

चंदौली जिले में अफसरों व लाभार्थियों की आपसी खींचतान के साथ साथ एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगाते रहने के कारण मनरेगा काउ शेड योजना शासन की मंशा के अनुरुप परवान नहीं चढ़ पा रही। कहा जा रहा है कि अफसरों ने किस्त रोक दी है, तो वहीं लाभार्थियों के पास इतने पैसे ही नहीं कि अधूरे काउ शेड पूरा कराकर अपना काम सही तरीके से कर पाएं।

जिले में मनरेगा के जरिए काउ शेड का निर्माण कराया जा रहा है। आधा निर्माण होने के बाद अधिकारियों ने लाभार्थियों की किस्त रोक दी है। उन्हें निर्माण पूरा कराने पर किस्त का भुगतान होने की बात कह रहे। उधर, लाभार्थियों के पास इतने पैसे ही नहीं कि अधूरा निर्माण पूरा कराएं। इससे यह योजना अधर में है। सोशल आडिट में जिले में काउ शेड अधूरे मिल रहे हैं।


योगी सरकार का बड़ा फोकस गोरक्षा जैसे काम पर है। ऐसे में पशुपालकों की सहूलियत के लिए मनरेगा के जरिए काउ शेड बनवाने का निर्देश है। इसके तहत लाभार्थियों के खाते में किस्त भेजी गई है। इससे लाभार्थियों ने अधूरा निर्माण तो करवा दिया। कहीं नींव ही खोदी गई तो कहीं दीवार खड़ी हुई, लेकिन आ्गे का निर्माण पैसे के अभाव में ठप पड़ा है। 


मनरेगा की सोशल आडिट में काउ शेड अधूरे मिल रहे हैं। लाभार्थियों का कहना है कि अफसरों ने किस्त रोक दी है। उनका निर्देश है कि पहले निर्माण पूरा कराएं। इसके बाद ही खाते में अगली किस्त जाएगी। बताया कि किसी के पास इतने पैसे ही नहीं कि निर्माण पूरा कराए। इसकी वजह से काउ शेड अधूरे हैं।

Manrega Cow Shed scheme

क्यों नहीं लग रहे हैं जानकारी वाले बोर्ड
 

मनरेगा के जरिए कराए गए व 14वें वित्त के विकास कार्यों में नागरिक सूचना बोर्ड (सीआइबी) नहीं लगवाए जा रहे हैं। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़ा हो गया है। शासन से स्पष्ट निर्देश हैं कि विकास कार्यों के बाद नागरिक सूचना बोर्ड जरूर लगवाए जाएं।

अब क्या बोल रहे अधिकारी


चंदौली जिले के मनरेगा उपायुक्त धर्मजीत सिंह का दावा है कि शासन से निर्धारित मानक के अनुरूप काउ शेड का निर्माण कराने के लिए लाभार्थियों के खाते में किस्त भेजी जा रही है। जहां निर्माण अधूरा है, वहां पूरा कराया जाएगा। योजना का पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन कराया जा रहा है।