चंदौली में दिखा मोहर्रम का चांद, शुरू हुआ हिजरी सन 1448 का नया साल और गम-ए-हुसैन का सिलसिला
चंदौली में मंगलवार शाम मोहर्रम का चांद नजर आते ही मजलिसों और मातम का दौर शुरू हो गया है। इस्लामिक नए साल 1448 हिजरी की शुरुआत के साथ ही 26 जून को इमाम हुसैन की शहादत का दिन यानी आशूरा मनाया जाएगा।
मोहर्रम का चांद दिखने से नया हिजरी साल शुरू
इमाम हुसैन की याद में मजलिसों का दौर
26 जून को जिले भर में मनाया जाएगा आशूरा
सुहागिन महिलाओं ने छोड़ा साज-श्रृंगार और चूड़ियां
जुल्म के खिलाफ शहादत का संदेश देता है मोहर्रम
चंदौली जिले में मंगलवार की शाम जैसे ही आसमान में मोहर्रम का चांद नजर आया, वैसे ही चारों तरफ गम-ए-हुसैन का सिलसिला शुरू हो गया। चांद दिखने के साथ ही इस्लामिक कैलेंडर के नए साल यानी हिजरी सन 1448 की पहली तारीख (16 जून 2026) की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के इमामबाड़ों, दरगाहों और कर्बलाओं में मजलिसों, अलम और मातम का दौर शुरू हो गया है। रसूल के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जांबाज साथियों की शहादत की याद में मनाया जाने वाला यह शोक का महीना पूरे जिले को अकीदत और श्रद्धा के माहौल में डुबो चुका है।
हाजी नूर मखदूमा बादी का बयान: 26 जून को मनाया जाएगा आशूरा
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक हाजी नूर मखदूमा बादी ने चांद की तस्दीक करते हुए बताया कि मंगलवार देर शाम चांद दिखने के साथ ही मोहर्रम का पवित्र और शोक का महीना शुरू हो चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि इस बार इमाम हुसैन की शहादत का सबसे खास दिन यानी 'यौम-ए-आशूरा' (10 मोहर्रम) आगामी 26 जून को पूरे जिले भर में पूरी अकीदत के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कर्बला की जंग इंसानी इतिहास की एक ऐसी बेमिसाल जंग है, जिसने दुनिया को संदेश दिया कि जुल्म के आगे सिर न झुकाने वाले भले ही जंग में शहीद हो जाएं, लेकिन वे इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं, जबकि जुल्म करने वाले यजीद का नाम लेने वाला आज कोई नहीं बचा।
सुहागिनों ने त्यागा साज-श्रृंगार, अजाखानों में उमड़ी अकीदत
मोहर्रम की शुरुआत होते ही परंपरा के अनुसार मुस्लिम समाज की सुहागिन महिलाओं ने इमाम हुसैन के गम में अपने सुहाग की निशानी यानी हाथों की कांच की चूड़ियां तोड़ दी हैं। अब वे अगले दो महीने और आठ दिनों तक किसी भी तरह का साज-श्रृंगार या रंग-बिरंगे वस्त्र नहीं पहनेंगी। लाल और पीले चमकदार कपड़ों की जगह महिलाएं और पुरुष काले कपड़े पहनकर इमाम हुसैन का शोक मनाएंगे।
10 दिनों तक चलेगा मजलिसों और नजर-नियाज का दौर
मोहर्रम के इन शुरुआती दस दिनों में पूरे चंदौली जिले के विभिन्न मोहल्लों में ताजियों और अलम के पारंपरिक जुलूस निकालने की तैयारियां तेज हो गई हैं। 9 मोहर्रम को इमामबाड़ों और घरों में पवित्र कुरान ख्वानी का सिलसिला रात भर जारी रहेगा। वहीं, इमाम चौकों पर पूरी रात फातिहा पढ़ने और नजर-नियाज बांटने का दौर चलेगा। 26 जून को यौम-ए-आशूरा के दिन सभी ताजिए पूरी अकीदत के साथ स्थानीय कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किए जाएंगे। इस दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
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