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"ज़मीन खरीद़ने वाले मुसलमान हैं, कब्जाने वाले नहीं", चंदौली में मुहर्रम की मजलिस में मौलाना का बड़ा बयान

चंदौली के अज़ाख़ाना ए रज़ा में मुहर्रम की छठी मजलिस में मौलाना जाफर रिज्वी ने करबला का अहम संदेश दिया। मजलिस में बनारस व लखनऊ की मशहूर अंजुमनों के नौहों और मातम ने अजादारों की आंखें नम कर दीं।

 
 

हक पर चलना ही असली इस्लाम

मुहर्रम की छठी मजलिस का आयोजन

बनारस की अंजुमनों ने पढ़ा नौहा

औन और मोहम्मद की शहादत याद

आठ मुहर्रम को निकलेगा पारंपरिक दुलदुल

चंदौली के जिला मुख्यालय स्थित अज़ाख़ाना ए रज़ा में मुहर्रम की छठी मजलिस का भावपूर्ण आयोजन किया गया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना जाफ़र रिज़्वी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने करबला के मैदान में पहले जमीन खरीदी और फिर वहां अपना खेमा लगाया था। उन्होंने एक इंच जमीन भी न तो हराम में ली और न ही कभी किसी की जमीन हड़पी। मौलाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि करबला का सबसे बड़ा संदेश यही है कि जमीन खरीद कर रहने वाले मुसलमान हैं, किसी की जमीन पर नाजायज कब्जा करने वाले नहीं।

हक की राह पर चलना ही असली इस्लाम
मौलाना जाफ़र रिज़्वी ने अपनी तकरीर में कहा कि सिर्फ नमाज़ पढ़ना और रोज़े रखना ही अच्छे मुसलमान की निशानी नहीं होती। सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि इंसान नमाज़ और रोज़े को अपने आचरण और दिल में उतारे। उन्होंने कहा कि जहां नफ़रत नहीं होती, वहीं सच्चा इस्लाम होता है। दिलों को साफ रखने वाला और हमेशा हक (सच) के रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति ही असल मायने में मुसलमान है। जिसके दिल में नफरत भरी है, उसका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है।

औन और मोहम्मद की शहादत की दास्तां
मजलिस के दौरान मौलाना ने पैगंबर हजरत मोहम्मद और हजरत अली की फजीलत बयान की। इसके बाद उन्होंने करबला के मैदान में इमाम हुसैन के साथियों और छोटे-छोटे बच्चों की शहादत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह इमाम हुसैन के भांजे और जनाबे जैनब के दो जवान बेटों, औन और मोहम्मद ने बिना पानी पिए तीन दिन की प्यास में जंग लड़ी और सच की राह पर खुद को कुर्बान कर दिया। इस दर्दभरी दास्तां को सुनकर वहां मौजूद तमाम अजादारों की आंखें नम हो गईं।

बनारस और लखनऊ की अंजुमनों ने पेश की खिराजे अकीदत
इस मजलिस में लखनऊ और बनारस से आए मशहूर शायरों शम्सुल फैजाबादी, वकार सुल्तानपुरी और शाहिद बनारसी ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर अजादारों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही बनारस की प्रसिद्ध अंजुमन हुसैनिया (कच्चीबाग) ने अपने दर्दभरे नौहों से माहौल को गमगीन कर दिया, जबकि अंजुमन हुसैनिया (दोषीपुरा) के मातमदारों ने सीनाज़नी और मातमी दस्ते के जरिए करबला के बलिदान को पेश किया। सिकंदरपुर की स्थानीय अंजुमन अब्बासिया के बच्चों ने भी नौहा पढ़ा। इस कार्यक्रम में सभी धर्मों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। आयोजकों ने बताया कि आगामी आठ मुहर्रम को अजाखाने से पारंपरिक दुलदुल निकाला जाएगा, जिसके दर्शन के लिए भारी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है।

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