धान की नर्सरी में लग रहे खैरा और सफेदा रोग? कृषि अधिकारी ने बताया अचूक इलाज
चंदौली के जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने धान की नर्सरी को खैरा, सफेदा और झोंका जैसी बीमारियों से बचाने के लिए जरूरी सलाह दी है। फसल को नुकसान से बचाने और सही दवाओं के छिड़काव की पूरी जानकारी के लिए खबर पढ़ें।
धान नर्सरी के लिए गाइडलाइन जारी
खैरा रोग के लिए जिंक सल्फेट
सफेदा रोग में फेरस सल्फेट जरूरी
झोंका रोग रोकने को कार्बण्डाजिम छिड़कें
तना छेदक के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल सलाह
चंदौली में धान का सीजन शुरू होते ही फसलों में लगने वाली बीमारियों को लेकर कृषि विभाग अलर्ट हो गया है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने धान की नर्सरी को तरह-तरह के रोगों से सुरक्षित रखने के लिए किसानों के नाम एक बेहद जरूरी और महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में धान की नर्सरी में खैरा, सफेदा और झोंका जैसे रोगों का हमला होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इन खतरनाक बीमारियों से अपनी पौध को बचाने के लिए किसानों को सही समय पर सही कदम उठाने होंगे, जिसके लिए विभाग ने पूरी गाइडलाइन जारी कर दी है।

बुवाई के तुरंत बाद क्या करें किसान?
कृषि अधिकारी के मुताबिक, किसानों को धान की नर्सरी लगाने के ठीक 10 दिन के अंदर ट्राइकोडर्मा का पहला छिड़काव हर हाल में कर देना चाहिए। इसके बाद, बुवाई के 10 से 14 दिन बीत जाने पर फसलों को रोगों और कीड़ों से सुरक्षित रखने के लिए एक सेफ्टी स्प्रे (सुरक्षात्मक छिड़काव) करना बहुत जरूरी है।
खैरा और सफेदा रोग का ऐसे करें इलाज
अगर नर्सरी में खैरा रोग का प्रकोप दिखाई दे, तो इसके इलाज के लिए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 5 किलो जिंक सल्फेट को 20 किलो यूरिया या फिर 2.5 किलो बुझे हुए चूने के साथ 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें। पहला छिड़काव 10 दिन बाद और दूसरा छिड़काव 20 दिन बाद करें। वहीं सफेदा रोग पर काबू पाने के लिए 4 किलो फेरस सल्फेट को 20 किलो यूरिया के घोल के साथ मिलाकर खेतों में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
झोंका, भूरे धब्बे और तना छेदक का समाधान
फसल को झोंका रोग से बचाने के लिए प्रति हेक्टेयर 500 ग्राम कार्बण्डाजिम 50 डब्ल्यूपी का छिड़काव सबसे ज्यादा असरदार साबित होता है। अगर पत्तों पर भूरे धब्बे का रोग दिख रहा है, तो प्रति हेक्टेयर 2 किलो जिंक मैंगनीज कार्बामेट का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, नर्सरी को तना छेदक कीट (कीड़ों) से बचाने के लिए खेत में हल्का पानी रखें और प्रति हेक्टेयर 10 किलो क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 0.4 प्रतिशत दानेदार का छिड़काव करें।
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