धान की फसल में दिखें ये लक्षण तो हो जाएं सावधान, कृषि रक्षा अधिकारी ने बताए बचाव के असरदार उपाय
चंदौली में धान की फसल पर 'तना छेदक' कीट का खतरा मंडरा रहा है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने एडवाइजरी जारी कर किसानों को इसके लक्षण और बचाव के रासायनिक व जैविक उपाय बताए हैं।
धान की फसल पर तना छेदक का खतरा
उमस भरे मौसम में तेजी से फैलाव
कीट नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप की सलाह
कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव की एडवाइजरी
तना छेदक से बचाव के असरदार रासायनिक उपाय
चंदौली जिले में धान की फसल को कीटों के प्रकोप से सुरक्षित रखने के लिए कृषि रक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार यादव ने धान के सबसे खतरनाक 'तना छेदक कीट' (स्टेम बोरर) के लक्षणों और उससे बचाव के उपायों को लेकर एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने किसानों को समय रहते फसल की देखभाल करने की सलाह दी है।
कीट के लक्षण और नुकसान की पहचान
कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि तना छेदक कीट की सुंडियां नर्सरी से लेकर बालियां निकलने तक फसल को नुकसान पहुंचाती हैं। शुरुआती दौर में सुंडी तने को अंदर से खा जाती है, जिससे पौधा सूख जाता है। सूखे तने को खींचने पर वह आसानी से हाथ में आ जाता है। जब बालियां आती हैं, तो संक्रमण के कारण बिना दाने वाली सफेद बालियां (डेड हार्ट) निकलती हैं। गर्म और उमस भरे मौसम में यह कीट बहुत तेजी से फैलता है, जिससे पैदावार में बड़ी गिरावट आती है।
जैविक और यांत्रिक बचाव के उपाय
कीटों से बचाव के लिए उन्होंने सलाह दी है कि जुलाई के पहले पखवाड़े तक रोपाई का काम पूरा कर लें। रोपाई से पहले पौधों की नर्सरी के ऊपरी हिस्से को काटकर ही खेतों में लगाएं। खेत में कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप (गंध पाश जाल) लगाएं। इसके अलावा, व्यस्क पतंगों को नष्ट करने के लिए खेत में 'लाइट ट्रैप' (प्रकाश जाल) का इस्तेमाल करें।
कीट नियंत्रण के लिए रासायनिक छिड़काव
कीट का हमला होने पर बाईफेनथ्रिन (10% EC) की 500 मिली या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल (18.5% SC) की 150 मिली मात्रा को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इसके अलावा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड (4% GR) या फिप्रोनिल (0.3% GR) की 18 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में 3 से 5 सेमी स्थिर पानी रखते हुए छिड़काव करें।
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