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चंदौली में पहली बार 17 हेक्टेयर में होगी फूलों की खेती, रजनीगंधा और ग्लैडियोलस से किसान होंगे मालामाल

परंपरागत खेती छोड़ अब चंदौली के किसान रजनीगंधा और ग्लैडियोलस जैसे कीमती फूलों से अपनी किस्मत चमकाएंगे। उद्यान विभाग द्वारा दिए जा रहे भारी अनुदान और 17 हेक्टेयर के लक्ष्य के साथ जिले में 'पुष्प क्रांति' की शुरुआत हो रही है।

 
 

रजनीगंधा और ग्लैडियोलस की खेती को बढ़ावा

कुल 17 हेक्टेयर खेती का लक्ष्य निर्धारित

मुख्यमंत्री औद्यानिक विकास योजना से लाभ

औषधीय फसलों पर भी मिलेगा भारी अनुदान

धान के कटोरे में नई आर्थिक क्रांति

ऐसा लगता है कि चंदौली जिले की पहचान अब बदलने वाली है। जिले के अन्नदाता अब पारंपरिक धान और गेहूं की खेती के साथ-साथ सुगंधित फूलों और औषधीय पौधों की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री औद्यानिक विकास योजना के तहत जिले में पहली बार रजनीगंधा और ग्लैडियोलस जैसे बल्ब एवं राइजोमेटिक पुष्पों की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है।

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17 हेक्टेयर में फूलों की खेती का लक्ष्य
उद्यान विभाग को इस वित्तीय वर्ष के लिए कुल 17 हेक्टेयर में फूलों की खेती का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिला उद्यान अधिकारी शैलेंद्र दुबे के अनुसार, इसमें 5 हेक्टेयर में रजनीगंधा और ग्लैडियोलस (बल्ब वाले फूल) तथा 12 हेक्टेयर में लूज फ्लावर यानी गेंदा की खेती की जाएगी। यह पहली बार है जब चंदौली में इतने व्यवस्थित तरीके से इन कीमती फूलों के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

औषधीय खेती से भी बढ़ेगी आय
फूलों के अलावा, जिले में औषधीय फसलों के प्रति भी रुझान बढ़ाया जा रहा है। विभाग ने सतावरी, सफेद मूसली, अश्वगंधा, तुलसी और मुलेठी जैसी फसलों के लिए 2 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया है। ये फसलें कम लागत में बेहतर मुनाफा देने के लिए जानी जाती हैं, जिससे जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार की उम्मीद है।

मिलेगा भारी अनुदान, पंजीकरण प्रक्रिया शुरू
आकांक्षी जिलों की श्रेणी में शामिल चंदौली के किसानों को इस योजना के तहत प्रति हेक्टेयर अधिकतम अनुदान मुहैया कराया जाएगा। उद्यान विभाग अब किसानों को जागरूक करने और उनके पंजीकरण की प्रक्रिया में तेजी से जुट गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को नकदी फसलों की ओर मोड़ना है ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके और जिले का कृषि निर्यात बढ़ सके।

परंपरागत खेती से आधुनिकता की ओर
चंदौली के किसान अब बाजार की मांग को समझते हुए अपनी खेती के पैटर्न में बदलाव ला रहे हैं। रजनीगंधा और ग्लैडियोलस की मांग बाजार में सजावट और सुगंध उद्योग के लिए काफी अधिक है। सरकारी प्रोत्साहन मिलने से किसानों में उत्साह है और वे इस नई पहल से जुड़कर अपनी समृद्धि का रास्ता तैयार कर रहे हैं।

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