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चंदौली की सड़कों पर उतरी मशालें: 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों ने TET अनिवार्यता के खिलाफ खोला मोर्चा

चंदौली में शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकालकर TET अनिवार्यता का विरोध किया। शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 2011 से पहले नियुक्त लाखों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है, जिसे बचाने के लिए कानून संशोधन जरूरी है।

 

सदर में शिक्षकों का विशाल मशाल जुलूस

25 लाख शिक्षकों की नौकरी पर बड़ा संकट

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन

TET अनिवार्यता और जबरन रिटायरमेंट का विरोध

कानून में संशोधन की सरकार से मांग

चंदौली जनपद में सोमवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने सदर ब्लॉक में विशाल मशाल जुलूस निकालकर अपनी आवाज बुलंद की। पूर्व माध्यमिक विद्यालय सदर से शुरू हुआ यह जुलूस कचहरी अंडरपास और पावर हाउस अंडरपास होते हुए गुजरा। हाथों में मशालें थामे सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सरकार और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी।

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25 लाख शिक्षकों के भविष्य पर मंडराता खतरा
जुलूस का नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष रामइच्छा सिंह और जिला महामंत्री उपेंद्र बहादुर सिंह ने शिक्षकों की चिंताओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 को दिए गए निर्णय के अनुसार, वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी अब TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षक नेताओं का दावा है कि इस फैसले से देशभर के लगभग 25 लाख शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है। यदि वे इस परीक्षा को पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का सामना करना पड़ सकता है, जो उनके साथ घोर अन्याय होगा।

कानून में संशोधन की प्रमुख मांग
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि इस संकट को देखते हुए शिक्षा संबंधी कानून में आवश्यक संशोधन किया जाए। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आनंद कुमार पांडे ने स्पष्ट किया कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षक लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और इस अवस्था में उनसे परीक्षा की अपेक्षा करना तर्कसंगत नहीं है। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि वे अनुशासित और संवैधानिक तरीके से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन यदि सरकार ने उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की, तो आंदोलन को और अधिक उग्र बनाया जाएगा।

आंदोलन को मिला व्यापक जनसमर्थन
इस मशाल जुलूस में पुरुष शिक्षकों के साथ-साथ महिला शिक्षकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सुनील कुमार सिंह, सच्चिदानंद पांडे, शाहबाज आलम खान, शशिकांत गुप्ता, अजय सिंह, धीरेंद्र विक्रम सिंह और आत्म प्रकाश पांडे सहित भारी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। शिक्षकों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि जब तक सरकार कानून में बदलाव कर उनकी नौकरी को सुरक्षा प्रदान नहीं करती, तब तक उनका यह लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।

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