UP Board Exam 2026: अब बीमारी का बहाना नहीं चलेगा, मेडिकल लीव के लिए आ गया है नया फरमान
यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 के दौरान शिक्षकों और कर्मचारियों की गैरमौजूदगी रोकने के लिए बोर्ड ने सख्त कदम उठाए हैं। अब परीक्षा ड्यूटी से बचने के लिए फर्जी मेडिकल नहीं चलेगा; अवकाश के लिए CMO का प्रमाण पत्र और गहन जांच अनिवार्य कर दी गई है।
यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 हेतु सख्त गाइडलाइन जारी
बिना CMO रिपोर्ट के मेडिकल लीव नहीं होगी मान्य
चंदौली जनपद में परीक्षा ड्यूटी पर कड़ी निगरानी
फर्जी मेडिकल अवकाश लेकर गायब होने वालों पर नकेल
18 फरवरी से शुरू होंगी हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं
चंदौली जिले में माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (UP Board) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं को शुचितापूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए कमर कस ली है। इस बार बोर्ड ने परीक्षा ड्यूटी से बचने के लिए लिए जाने वाले 'चिकित्सकीय अवकाश' (Medical Leave) को लेकर बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश चंदौली जनपद सहित प्रदेश के सभी जिलों में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

18 फरवरी से शुरू होगा परीक्षाओं का महाकुंभ
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 18 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 12 मार्च 2026 तक संचालित की जाएंगी। परीक्षा के सफल संचालन के लिए बोर्ड को बड़ी संख्या में कक्ष निरीक्षकों और केंद्र व्यवस्थापकों की आवश्यकता होती है। अक्सर यह देखा गया है कि परीक्षा शुरू होते ही कई प्रधानाचार्य और शिक्षक बीमारी का हवाला देकर अवकाश पर चले जाते हैं, जिससे परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था चरमरा जाती है।
बिना CMO की अनुमति के नहीं मिलेगा अवकाश
बोर्ड द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि कोई प्रधानाचार्य, शिक्षक या कर्मचारी परीक्षा ड्यूटी के दौरान चिकित्सकीय अवकाश के लिए आवेदन करता है, तो उसके अस्वस्थता प्रमाण पत्र का मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) द्वारा प्रमाणित होना अनिवार्य होगा। परिषद ने स्पष्ट किया है कि बिना जिला अस्पताल के CMO की रिपोर्ट के किसी भी निजी डॉक्टर का मेडिकल सर्टिफिकेट मान्य नहीं किया जाएगा।
फर्जी मेडिकल पर लगेगी लगाम
परिषद ने निर्देश दिए हैं कि अवकाश के लिए आवेदन करने वाले कर्मियों की समुचित चिकित्सकीय जांच कराई जाए। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अवकाश वास्तव में बीमारी के कारण लिया जा रहा है या केवल ड्यूटी से बचने का एक बहाना है। माध्यमिक शिक्षा परिषद का मानना है कि परीक्षा कार्य एक आवश्यक और समयबद्ध राजकीय सेवा है, जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासनिक निगरानी और सख्ती
चंदौली जनपद में इन निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। बोर्ड ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भी निगरानी के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि अनावश्यक अवकाश के आवेदनों को निरस्त किया जाए और बिना ठोस कारण अनुपस्थित रहने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
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