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रक्षाबंधन पर योगी सरकार की मुफ्त बस सेवा चंदौली में फेल? निजी वाहनों की छतों पर सफर करने को मजबूर हुईं महिलाएं

रक्षाबंधन पर योगी सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस सफर का ऐलान किया था, लेकिन चंदौली में यह योजना पूरी तरह फेल साबित हुई। डिपो की 51 बसें होने के बावजूद बहनें बसों के लिए तरसती रहीं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

 
 

चंदौली में रोडवेज की पोल खुली

51 बसें फिर भी बसें गायब

फ्री बस सेवा का नहीं मिला लाभ

निजी वाहनों की मनमानी और ओवरलोडिंग

बसों के अभाव में महिलाएं परेशान

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने महिलाओं को बड़ी सौगात देते हुए मुफ्त रोडवेज सफर का ऐलान किया था। सरकार ने यूपीएसआरटीसी (UPSRTC) की बसों में 27 अगस्त की सुबह 6 बजे से लेकर 29 August की रात 12 बजे तक महिलाओं और उनके साथ एक सहयात्री (परिजन) के लिए फ्री यात्रा की सुविधा दी थी। हालांकि, चंदौली जिले में यह योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई और बसों के अभाव में बहनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।


51 बसें आवंटित, फिर भी बस स्टॉप पर सन्नाटा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चंदौली डिपो के नाम पर कुल 51 बसें आवंटित की गई हैं। इसके बावजूद रक्षाबंधन के दिन जिला मुख्यालय और प्रमुख बस स्टैंडों पर एक भी रोडवेज बस का दीदार तक नहीं हुआ। अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए घर से निकली महिलाएं घंटों बस स्टॉप पर खड़ी होकर रोडवेज बसों का इंतजार करती रहीं। चंदौली के डिपो से बसें न चलने के कारण जिले के मुख्य बस अड्डों पर केवल सन्नाटा और यात्रियों की भीड़ ही नजर आई।

केवल मुगलसराय से वाराणसी के बीच चलीं कुछ बसें
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि डिपो की 51 बसें होने के बावजूद ज्यादातर रूटों पर बसें दिखाई ही नहीं दीं। गिनती की कुछ ही रोडवेज बसें केवल मुगलसराय से वाराणसी मार्ग पर आती-जाती दिखीं। वहीं सैयदराजा, सकलडीहा, धानापुर, चकिया और नौगढ़ जैसे बड़े और ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को सरकारी रोडवेज सेवा का कोई फायदा नहीं मिल सका। इन इलाकों की बहनें बसों का इंतजार करते-करते थक गईं, लेकिन उन्हें बसें नसीब नहीं हुईं।

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निजी वाहनों की मनमानी, छतों पर बैठकर सफर को मजबूर
रोडवेज बसों का संचालन न होने का पूरा फायदा निजी वाहन चालकों ने उठाया। निजी बस और टैक्सी चालकों ने यात्रियों से मनमाना किराया वसूला। बसों में जगह न होने की वजह से लोग जान जोखिम में डालकर निजी बसों की छतों पर चढ़कर यात्रा करने को मजबूर दिखाई दिए। प्रदेश के मुखिया द्वारा वृद्ध महिलाओं और बहनों को सुरक्षित और मुफ्त सफर की सुविधा देने की बात कही गई थी, लेकिन चंदौली के अधिकारियों की अलग दलीलों और लचर व्यवस्था ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की हवा निकाल दी।

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