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मारपीट के 24 साल पुराने मामले में भागवंत हरिजन को मिली 3 साल की जेल

थाना चकिया के पैरोकार आरक्षी राजीव प्रजापति की प्रभावी पैरवी और साक्षियों के अचूक साक्ष्य के कारण ही इतने पुराने मामले में अभियुक्त को सजा दिलाई जा सकी।
 

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चकिया कोर्ट का फैसला

24 साल पुराने मामले में एक अभियुक्त को 3 वर्ष की कैद

चकिया कोतवाली में 2001 में दर्ज किया गया था मामला

चंदौली जिले में उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर चलाए जा रहे "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान के अंतर्गत, चंदौली पुलिस को एक और बड़ी न्यायिक सफलता मिली है। पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना, अचूक साक्ष्य संकलन और लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी के चलते एक पुराने मामले के अभियुक्त को न्यायालय ने कठोर सजा सुनाई है।

24 साल पुराने मामले में सजा
यह मामला थाना चकिया से संबंधित है, जो लगभग 24 साल पुराना है।  दिनांक 15 जून 2001 को धारा 323, 325 (गंभीर चोट पहुंचाना) और 504 (जानबूझकर अपमान करना) के तहत भागवंत हरिजन पुत्र बच्चा हरिजन निवासी नेवागंज, थाना चकिया के विरुद्ध मुकदमा अपराध संख्या 118/2001 दर्ज किया गया था।

इसी मामले में न्यायालय श्री कुंवर जितेंद्र प्रताप सिंह (सिविल जज, जूनियर डिवीजन/जेएम चकिया) ने अभियुक्त भागवंत हरिजन को दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कारावास और 9,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्थदंड जमा न करने पर अभियुक्त को 7 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

प्रभावी पैरवी से मिला न्याय
पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक सदर अनंत चंद्रशेखर के पर्यवेक्षण में, इस मामले में मॉनिटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी और सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) विजेयता सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। थाना चकिया के पैरोकार आरक्षी राजीव प्रजापति की प्रभावी पैरवी और साक्षियों के अचूक साक्ष्य के कारण ही इतने पुराने मामले में अभियुक्त को सजा दिलाई जा सकी।

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