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चंदौली में 'ऑपरेशन कन्विक्शन' का असर: सालों पुराने 3 मामलों में अपराधियों को मिली सजा

चंदौली पुलिस के 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान के तहत वैज्ञानिक साक्ष्य और प्रभावी पैरवी के चलते तीन अलग-अलग पुराने मुकदमों में तीन अभियुक्तों को दोषसिद्ध ठहराते हुए सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने इन पर अर्थदण्ड भी लगाया है।

 
 

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चंदौली में बड़ी सफलता

दशकों पुराने मुकदमों में अपराधियों को हुई सजा

वैज्ञानिक विवेचना और अचूक साक्ष्य संकलन का असर

सीजेएम श्रीमती इशरत परवीन फारुखी ने सुनाया फैसला

अभियोजन विभाग की प्रभावी पैरवी से मिली सफलता

उत्तर प्रदेश शासन की प्राथमिकता वाले 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान के तहत चंदौली जनपद की पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जनपदीय पुलिस द्वारा की गई वैज्ञानिक विवेचना, अचूक साक्ष्य संकलन और लोक अभियोजक की सशक्त पैरवी के परिणामस्वरूप न्यायालय ने तीन अलग-अलग मुकदमों में तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। यह कार्रवाई जनपद में अपराधियों के भीतर कानून का खौफ पैदा करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

क्या है ऑपरेशन कन्विक्शन?
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जघन्य अपराधों, छेड़खानी, मादक पदार्थों की तस्करी और चोरी जैसे मामलों में अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलवाना है। चंदौली पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में मानिटरिंग सेल और थानों के पैरोकार सक्रिय रूप से न्यायालयों में साक्ष्यों को प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसका परिणाम अब सजा के रूप में सामने आ रहा है।

केस 1: एनडीपीएस एक्ट के मामले में जलालुद्दीन को सजा
पहला मामला वर्ष 2005 का है। थाना चन्दौली के अंतर्गत अपराध संख्या 44/2005 में धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत अभियुक्त जलालुद्दीन हाशमी पुत्र एजाज हाशमी, निवासी वार्ड नं. 089, आजादनगर, चन्दौली के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था।

मानिटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी, सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) श्री मनीष कुमार और थाना चन्दौली के पैरोकार हेड कांस्टेबल अजय कुमार की प्रभावी पैरवी के कारण, 31 जनवरी 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती इशरत परवीन फारुखी ने फैसला सुनाया। अभियुक्त को न्यायालय उठने तक की सजा और जेल में बिताई गई अवधि की सजा के साथ 1000 रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया। जुर्माना न भरने पर उसे 3 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

केस 2: चोरी और क्षति पहुँचाने के मामले में नन्दलाल गुप्ता दोषी
दूसरा मामला लगभग 25 साल पुराना है। वर्ष 2001 में थाना चन्दौली में अपराध संख्या 44/2001 के तहत धारा 379 (चोरी), 411 और 427 भादवि के तहत नन्दलाल गुप्ता पुत्र भगवान दास, निवासी शिवगुलाल पुर, जौनपुर के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत था।

इस पुराने मामले में भी पुलिस ने साक्ष्यों को मजबूती से रखा। न्यायालय ने नन्दलाल गुप्ता को दोषी पाते हुए उसे 'न्यायालय उठने तक' की सजा और 2000 रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई। अर्थदण्ड न देने की स्थिति में उसे 2 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

केस 3: सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले बजनू राम को दंड
तीसरा मामला वर्ष 2002 का है, जिसमें अभियुक्त बजनू राम पुत्र कतवारु, निवासी लकीपुर, गाजीपुर के विरुद्ध थाना चन्दौली में धारा 224 और 225 भादवि (अपराध संख्या 145/2002) के तहत केस दर्ज किया गया था।

इस मामले में भी अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बजनू राम को दोषी माना। उसे न्यायालय उठने तक की सजा और 1000 रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया गया। अर्थदण्ड न देने पर 1 दिन की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।

पुलिस टीम की तत्परता और भविष्य की रणनीति
इन तीनों मामलों में सफलता का श्रेय मानिटरिंग सेल के प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी, एपीओ मनीष कुमार और पैरोकार हेड कांस्टेबल अजय कुमार की मेहनत को जाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लंबित मामलों में प्रभावी पैरवी से न केवल न्यायपालिका पर जनता का विश्वास बढ़ता है, बल्कि अपराधियों में भी संदेश जाता है कि वे कितने भी पुराने मामले हों, कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। चंदौली पुलिस आने वाले समय में अन्य गंभीर मामलों में भी इसी तरह की त्वरित पैरवी जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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