ऑपरेशन कन्विक्शन का असर: चंदौली कोर्ट ने पशु तस्करी और चोरी के 3 मामलों में दी अपराधियों को सजा
चंदौली में 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत पुलिस और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी से गोवध व चोरी के तीन पुराने मामलों में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। आरोपियों को दोषसिद्ध ठहराते हुए जेल की सजा और अर्थदंड से दंडित किया गया।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मिली बड़ी सफलता
गोवध और चोरी के आरोपी पाए गए दोषी
अदालत ने सुनाया जेल और जुर्माने का फैसला
चंदौली पुलिस और पैरोकारों की मजबूत पैरवी
चंदौली जिले में अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान को बड़ी सफलता मिली है। चंदौली पुलिस द्वारा की गई वैज्ञानिक विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन और अदालत में प्रभावी पैरवी के चलते अलग-अलग मामलों के तीन अभियुक्तों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है। अदालत ने सभी दोषियों को जेल में बिताई गई अवधि की सजा के साथ-साथ अर्थदंड की सजा सुनाई है।
गोवध निवारण अधिनियम के आरोपी को सजा
पहला मामला थाना चंदौली से जुड़ा है, जहां साल 2004 में गोवध निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में भदोही जिले के थाना गोपीगंज स्थित किशुनदेवपुर निवासी अभियुक्त शिवराम (पुत्र राम सुमेर बिंद) को अदालत ने दोषी पाया।
सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/एफटीसी-प्रथम की न्यायाधीश श्रीमती शिवानी की अदालत ने आरोपी को जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 1600 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर अभियुक्त को 3 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। इस केस में अभियोजक विजय पांडेय (एपीओ) और पैरोकार मुख्य आरक्षी अजय कुमार की भूमिका अहम रही।
27 साल पुराने मामले में भी हुई सजा
दूसरा मामला थाना सैयदराजा का है, जहां वर्ष 1999 में गोवध और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। इस मामले में चंदौली के दिघवट गांव निवासी अभियुक्त देवचरन राजभर (पुत्र भग्गू) पर दोष सिद्ध हुआ।
सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/एफटीसी-द्वितीय की न्यायाधीश सुश्री इशा राय की अदालत ने अभियुक्त को जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना न चुकाने पर 3 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में एपीओ विजय कुमार पांडेय और पैरोकार आरक्षी राजीव कुमार प्रजापति ने प्रभावी पैरवी की।
चोरी के आरोपी को भी कोर्ट ने ठहराया दोषी
तीसरा मामला थाना बलुआ का है, जहां साल 2011 में चोरी (धारा 457 भादवि) का मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें भलेहरा निवासी आरोपी संजय सेठ (पुत्र अमरनाथ सेठ) को अदालत ने दोषी करार दिया।
सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/एफटीसी-द्वितीय सुश्री इशा राय की कोर्ट ने अभियुक्त संजय सेठ को जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 3000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को 4 दिन अतिरिक्त जेल में रहने का आदेश दिया गया है। इस केस में वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) मनीष कुमार और पैरोकार आरक्षी बृजेश कुमार सरोज ने पैरवी की।
कानून-व्यवस्था मजबूत करने की कवायद
चंदौली पुलिस का कहना है कि 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत पुराने से पुराने मामलों में भी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पैरवी की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य अपराधियों को सजा दिलाकर न्याय प्रणाली में आम जनता का विश्वास और अधिक मजबूत करना है।
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