ऑपरेशन कन्विक्शन का असर, आर्म्स एक्ट और पशु तस्करी के 2 अपराधियों को अदालत ने सुनाई सजा
चंदौली में 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत पुलिस ने प्रभावी पैरवी कर आर्म्स एक्ट और गोवध निवारण अधिनियम के दो अलग-अलग मामलों में दोषियों को सजा दिलाई। अदालत ने अर्थदंड भी लगाया है।
चंदौली में ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान
आर्म्स एक्ट में दोषी को सजा
पशु तस्करी मामले में फैसला
चंदौली पुलिस की प्रभावी पैरवी
अदालत द्वारा दोषियों को दंड
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देशों के क्रम में चंदौली जनपद में संचालित "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान निरंतर अपराधियों के लिए काल साबित हो रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अपराधों में वैज्ञानिक विवेचना, साक्ष्यों का अचूक संकलन और लोक अभियोजकों की प्रभावी पैरवी के माध्यम से अपराधियों को कम से कम समय में सजा सुनिश्चित करना है। इसी कड़ी में शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को चंदौली की अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में दोषियों को दंडित कर न्याय की मिसाल पेश की है।
आर्म्स एक्ट के दोषी को मिली सजा
पहला मामला थाना बलुआ से संबंधित है, जो वर्ष 2004 में दर्ज किया गया था। रामबचन यादव पुत्र गागा यादव (निवासी हरधन जूडा, थाना बलुआ) के विरुद्ध 13 फरवरी 2004 को आर्म्स एक्ट की धारा 4/25 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। मॉनिटरिंग सेल के प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी, एपीओ नितिश कुमार तिवारी और थाना बलुआ के पैरोकार कांस्टेबल बृजेश कुमार सरोज द्वारा अदालत में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप पीठासीन अधिकारी सुश्री शिवानी (सिविल जज/एफटीसी प्रथम) की अदालत ने रामबचन यादव को दोषी करार दिया। उसे जेल में बिताई गई अवधि तक की सजा और 1500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड न भरने की स्थिति में उसे 7 दिनों का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पशु तस्करी में भी सजा बरकरार
दूसरा मामला थाना सैयदराजा से जुड़ा है, जहाँ 22 जुलाई 2004 को कलीम पुत्र सलीम (निवासी मोहन सराय, थाना रोहनिया, वाराणसी) के विरुद्ध गोवध निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था। इस मामले में भी मॉनिटरिंग सेल और थाना सैयदराजा के पैरोकार कांस्टेबल राजेंद्र प्रसाद की सक्रियता से अदालत में मजबूत पक्ष रखा गया। अदालत ने कलीम को दोषी पाते हुए उसे भी जेल में बिताई गई अवधि तक की सजा और 1500 रुपये के अर्थदंड का आदेश दिया। अर्थदंड न चुकाने पर इसे भी 7 अतिरिक्त दिनों की सजा काटनी होगी।
पुलिस की मेहनत और न्याय की जीत
इन दोनों मामलों में चंदौली पुलिस की मॉनिटरिंग सेल और पैरवी करने वाली टीम ने जिस मुस्तैदी से काम किया, वह सराहनीय है। लगभग दो दशक पुराने मामलों में दोषियों को सजा दिलाकर पुलिस ने यह संदेश दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, न्याय प्रक्रिया अपना काम जरूर करेगी। चंदौली पुलिस के इस 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान ने जनपद में कानून-व्यवस्था और न्याय के प्रति आमजन का भरोसा और अधिक मजबूत किया है।
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