चंदौली में अंतरराष्ट्रीय साइबर गैंग का भंडाफोड़: जापान के बुजुर्गों को बनाते थे शिकार, 5 अभियुक्त गिरफ्तार
मुगलसराय के कैलाशपुरी में चल रहे हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर का चंदौली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। जापानी भाषा सीखकर जापान के बुजुर्गों से साइबर ठगी करने वाले 5 शातिर गिरफ्तार किए गए, जबकि 9 लाख रुपये फ्रीज करा दिए गए हैं।
चंदौली में अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह गिरफ्तार
मुगलसराय में अवैध कॉल सेंटर सीज
जापानी भाषा सीखकर करते थे साइबर ठगी
नौ लाख रुपये बैंक खाते में फ्रीज
भारी मात्रा में कंप्यूटर व फर्जी दस्तावेज बरामद
चंदौली जिले में स्वाट, सर्विलांस, साइबर सेल और थाना मुगलसराय पुलिस की संयुक्त टीम ने मिलकर एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मुगलसराय के कैलाशपुरी स्थित एक बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर 5 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर की गई। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो वहां बाकायदा वीडियोग्राफी कराते हुए कमरे में प्रवेश किया गया। उस समय कंप्यूटर स्क्रीन पर लाइव कॉलिंग चल रही थी और वहां मौजूद लड़के विदेशी भाषा में बातचीत कर रहे थे।

जापानी भाषा सीखकर बुजुर्गों को बनाते थे शिकार
पुलिस की गहन पूछताछ में गिरफ्तार अभियुक्तों ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि उन्होंने बिहार के नालंदा और गया में जापानी भाषा सीखी थी। इसके बाद वे इंटरनेट कॉलिंग (VoIP) के जरिए सीधे जापान के नागरिकों को अपना निशाना बनाते थे। गिरोह का मुख्य निशाना जापान के वे बुजुर्ग नागरिक होते थे जिन्हें तकनीक की ज्यादा समझ नहीं थी, लेकिन उनके बैंक खातों में जीवन भर की जमा-पूंजी मौजूद रहती थी। ठग खुद को कंप्यूटर का टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताकर उनका भरोसा जीतते थे।

ठगी का हाईटेक तरीका: रिमोट एक्सेस और जापानी नंबर
ठग कोई साधारण सिम इस्तेमाल नहीं करते थे, बल्कि विदेशी सर्वर पर चलने वाले इंटरनेट कॉलिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग करते थे। इससे पीड़ित के फोन पर जापान (+81) का नंबर दिखाई देता था। हर 3-4 मिनट में ये ठग एक नया शिकार तलाश लेते थे। इसके बाद वे जापानी वेबसाइट के माध्यम से पीड़ितों के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते थे। फिर 'वेरिफिकेशन' के नाम पर वेबकैम चालू करवाकर बुजुर्गों को कैमरे के सामने बैठा देते थे और उनके बैंकिंग ऐप का इस्तेमाल कर लाखों येन खातों में ट्रांसफर करा लेते थे।
चाइनीज कनेक्शन, हवाला और फर्जी दस्तावेज
पूछताछ में सामने आया कि ठगी का पैसा ट्रांसफर करने के लिए चाइनीज मेंबर्स द्वारा फर्जी (म्यूल) बैंक खाते मुहैया कराए जाते थे। गिरोह का मुख्य सरगना हवाला के जरिए जापानी करेंसी को भारतीय रुपयों में बदलता था। पहचान छिपाने के लिए अभियुक्तों ने वाराणसी के पते पर फर्जी पहचान पत्र भी बनवा रखे थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने त्वरित कदम उठाते हुए अभियुक्त रौनक सिंह के दो बैंक खातों में जमा लगभग 9.00 लाख रुपये तत्काल फ्रीज करा दिए हैं। गिरोह का मुख्य सरगना और 3 अन्य आरोपी पुलिस के पहुंचने से ठीक पहले भाग निकले थे, जिनकी तलाश जारी है।
भारी मात्रा में कंप्यूटर, लैपटॉप और उपकरण बरामद
पुलिस टीम ने मौके से 19 कंप्यूटर सेट (मॉनिटर, सीपीयू, की-बोर्ड, माउस, हेडफोन), 3 लैपटॉप, 6 महंगे मोबाइल फोन, 3 वाई-फाई राउटर, टीपी-लिंक और डी-लिंक हब के साथ-साथ 5 फर्जी पहचान पत्र बरामद किए हैं। इस मामले में थाना मुगलसराय में धारा 3(5), 61(2), 318(4), 319(2), 336(3), 337, 338, 339, 340(2), 341(1) बीएनएस व 66C, 66D आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:--
रौनक सिंह (32 वर्ष): निवासी ग्राम सैदपुर, थाना बेन, जनपद नालंदा (बिहार) — (कॉल सेंटर का मैनेजर)
रोशन कुमार (21 वर्ष): निवासी नया बाईपास, थाना विष्णुपथ, जनपद गया (बिहार)
अमन कुमार (23 वर्ष): निवासी मंगला बोरिंग, थाना विष्णुपथ, जनपद गया (बिहार)
अंकित कुमार (25 वर्ष): निवासी नीमडीह, थाना रूपौ, जनपद नवादा (बिहार)
विकास वैभव (25 वर्ष): निवासी वारिस नगर रामशिला, थाना कोतवाली, जनपद गया (बिहार)
सफलता पाने वाली पुलिस टीम
इस बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश करने में थानाध्यक्ष मुगलसराय अर्जुन सिंह, साइबर सेल प्रभारी मिर्जा रिजवान बेग, उप निरीक्षक अभिषेक शुक्ला, स्वाट प्रभारी राम जन्म यादव, सर्विलांस प्रभारी आशीष मिश्रा और उनकी पूरी पुलिस व साइबर कमांडो टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
Tags
चंदौली जिले की खबरों को सबसे पहले पढ़ने और जानने के लिए चंदौली समाचार के टेलीग्राम से जुड़े।*







