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फर्जी बिलिंग का खेल खत्म: प्लाजा लॉजिस्टिक कंपनी से धोखाधड़ी करने वाला रीजनल मैनेजर गिरफ्तार, ऐसे करता था हेराफेरी

मुगलसराय पुलिस ने बेंगलुरु से एक शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार किया है, जिसने प्रतिष्ठित लॉजिस्टिक कंपनी का क्षेत्रीय प्रबंधक रहते हुए फर्जी बिलों के जरिए लाखों की धोखाधड़ी की थी। पुलिस अब उसके सहयोगियों की तलाश कर रही है।

 
 

फर्जी ई-मेल और कूट रचित बिल

कंपनी के साथ लाखों की धोखाधड़ी

साथी की पत्नी के खाते में लेनदेन

बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा

चंदौली जिले की मुगलसराय कोतवाली पुलिस ने अंतर्राज्यीय धोखाधड़ी के मामले में एक बड़ी सफलता हासिल की है। मुगलसराय थाना पुलिस ने बेंगलुरु (कर्नाटक) से एक ऐसे अभियुक्त को गिरफ्तार किया है, जिसने एक प्रतिष्ठित लॉजिस्टिक कंपनी में ऊंचे पद पर रहते हुए विश्वासघात किया और कंपनी के लाखों रुपये डकार लिए।

क्या है पूरा मामला?
प्लाजा लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड के वादी प्रेम नारायण राय ने मुगलसराय थाने में तहरीर दी थी कि उनकी कंपनी के दक्षिण भारत के क्षेत्रीय प्रबंधक (रीजनल मैनेजर) फ्रांसिस इ ने कंपनी के साथ बड़े स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी की है। अभियुक्त ने कूटरचित दस्तावेज और फर्जी बिल तैयार कर कंपनी को ई-मेल के माध्यम से भेजे और असली बताकर भुगतान प्राप्त कर लिया। पुलिस ने इस मामले में मु.अ.सं. 565/2025 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।

बेंगलुरु में छापेमारी और गिरफ्तारी
पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे के निर्देश पर मुगलसराय प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने बेंगलुरु के ज्ञान भारती थाना क्षेत्र में दबिश दी। पुलिस ने वहां से अभियुक्त फ्रांसिस इ (46 वर्ष), निवासी शिवानंदा ले आउट, जेजे नगर, बेंगलुरु को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में खुला धोखाधड़ी का 'मोडस ऑपरेंडी'
पुलिस की पूछताछ में अभियुक्त ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह कंपनी के दक्षिण भारत का क्षेत्रीय प्रबंधक था। उसने अपने साथी जन्मेजय नायक के साथ मिलकर साजिश रची। वे फर्जी वेंडर और फर्जी बिल तैयार करते थे और उसे कंपनी को ई-मेल कर देते थे।

विश्वास जीतने के लिए वह कुछ छोटा भुगतान यूपीआई (UPI) के माध्यम से कंपनी को वापस कर देता था और बाकी रकम के लिए यह बहाना बनाता था कि "पार्टी से अभी पेमेंट नहीं मिला है।" उसने गबन की गई पूरी राशि अपने साथी जन्मेजय नायक की पत्नी के एसबीआई (SBI) खाते में मंगवाई थी। जब कंपनी ने एक ही वेंडर को बार-बार भुगतान करने पर सवाल उठाया, तो उसने झूठ बोला कि यह वेंडर सबसे सस्ती और अच्छी सुविधा देता है।

पुलिस टीम और वैधानिक कार्रवाई
इस सफल गिरफ्तारी में प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह, चौकी प्रभारी मनोज तिवारी और कांस्टेबल बंटी सिंह की अहम भूमिका रही। पुलिस ने अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश कर वैधानिक कार्यवाही शुरू कर दी है। साथ ही, प्रकरण में संलिप्त अन्य सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

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