चंदौली में 'ऑपरेशन कन्विक्शन' सफल, 7 अपराधियों को कोर्ट ने सुनाई सजा
जिले के 3 अलग-अलग मामलों में मिली सजा
कुल 7 अपराधियों को न्यायालय ने दी सजा
गोवध और पशु क्रूरता के साथ मारपीट के मामले में सजा
चंदौली जिले में उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान के तहत चंदौली पुलिस की बड़ी सफलता मिली है। पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन और लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी के कारण, जिले के तीन अलग-अलग मामलों में कुल सात अपराधियों को न्यायालय ने दोषी मानते हुए सजा सुनाई है। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि आपराधिक मामलों में त्वरित और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और न्यायपालिका मिलकर काम कर रहे हैं।
गोवध और पशु क्रूरता के मामलों में सजा
पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे और अपर पुलिस अधीक्षक सदर अनंत चंद्रशेखर के पर्यवेक्षण में चलाए गए इस अभियान के अंतर्गत, मॉनिटरिंग सेल के प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सैयदराजा थाना मामला: 2004 में गोवध निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में, आरोपी चंद्रशेखर राजभर को न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोषी ठहराया। उसे जेल में बिताई गई अवधि की सजा के साथ-साथ 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न चुकाने पर उसे 3 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
धानापुर थाना मामला: 2005 में गोवध और पशु क्रूरता से जुड़े एक अन्य मामले में, दो अभियुक्तों केदार यादव और त्रिभुवन बिंद को भी दोषी पाया गया। उन्हें भी जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 6,000-6,000 रुपये का अर्थदंड दिया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर 3 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
इन दोनों मामलों में थाना सैयदराजा के पैरोकार आरक्षी राजीव प्रजापति और थाना धानापुर के हेड कांस्टेबल सुभान अहमद की प्रभावी पैरवी से न्याय सुनिश्चित हो सका।
मारपीट के मामले में 4 अभियुक्तों को एक साल की सजा
'ऑपरेशन कन्विक्शन' की सफलता का तीसरा उदाहरण चकिया थाना क्षेत्र से आया है।
चकिया थाना मामला: 2001 में मारपीट और धमकी देने से संबंधित एक पुराने मामले में, चार अभियुक्तों - विद्यासागर चौहान, लोचन चौहान, राजेंद्र चौहान और राजनारायण चौहान को दोषी पाया गया है। न्यायालय पीठासीन अधिकारी श्री कुंवर जितेंद्र प्रताप सिंह (सिविल जज जूनियर डिवीजन/जेएम चकिया) ने इन चारों को एक-एक साल के कारावास और 2,000-2,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। यदि वे अर्थदंड का भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें 7 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में भी चकिया थाने के पैरोकार कांस्टेबल दुर्गेश कुमार यादव की सक्रिय पैरवी की सराहना की गई है।
पुलिस की प्रभावी पैरवी का परिणाम
इन सभी मामलों में पुलिस की मॉनिटरिंग सेल, विशेष रूप से प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी, और सहायक अभियोजन अधिकारियों (एपीओ) विपिन कुमार और विजेता सिंह की मेहनत रंग लाई। उनकी प्रभावी पैरवी और समय पर प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के कारण ही न्यायालय इन अपराधियों को सजा सुना सका।
'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अपराधियों को जल्द से जल्द सजा मिले, ताकि समाज में अपराध के प्रति भय कम हो और कानून का राज स्थापित हो सके। चंदौली पुलिस की यह सफलता दिखाती है कि वे इस दिशा में सही रास्ते पर हैं।
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