ऑपरेशन कन्विक्शन: पुराने मामलों में 8 अभियुक्तों को न्यायालय ने सुनाई सजा, गोवध निवारण अधिनियम के तहत बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान के तहत चंदौली पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। वैज्ञानिक साक्ष्य और प्रभावी पैरवी के चलते गोवंश तस्करी और आर्म्स एक्ट के 8 अभियुक्तों को न्यायालय ने आर्थिक दंड व कारावास की सजा सुनाई है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मिली बड़ी सफलता
गोवध निवारण अधिनियम के आरोपियों को सजा
आर्म्स एक्ट के अपराधियों पर चला न्यायालय का डंडा
चंदौली मॉनिटरिंग सेल की प्रभावी पैरवी रंग लाई
पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना से दोषसिद्ध हुए अपराधी
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देशानुसार अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने के लिए चलाए जा रहे "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान को चंदौली जनपद में बड़ी सफलता मिली है। जनपदीय पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना, साक्ष्यों के सटीक संकलन और मॉनिटरिंग सेल की प्रभावी पैरवी के चलते न्यायालय ने गोवंश तस्करी और अवैध शस्त्र रखने वाले कुल 8 अभियुक्तों को सजा सुनाई है।
शहाबगंज और नौगढ़ के गो-तस्करों पर चला कानून का डंडा
जनपद के विभिन्न थानों में दर्ज गोवध निवारण अधिनियम के मामलों में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। थाना शहाबगंज के वर्ष 2005 के एक पुराने मामले (अपराध संख्या 41/2005) में आरोपी अशोक, रामआसरे और उदल को अपर सिविल जज (चकिया) श्री यज्ञेश कुमार सोनकर ने दोषी करार दिया। इन तीनों को जेल में बिताई गई अवधि और न्यायालय उठने तक की सजा के साथ-साथ 2200 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
इसी क्रम में, थाना नौगढ़ के वर्ष 2001 के मामले में बिहार के कैमूर जिले के निवासी रामध्यन बिंद और रमाशंकर को भी सजा सुनाई गई। इन दोनों अभियुक्तों पर 1500-1500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अर्थदंड न भरने की स्थिति में इन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
आर्म्स एक्ट के अपराधियों को भी नहीं मिली राहत
अवैध असलहों के साथ पकड़े गए अपराधियों के खिलाफ भी पुलिस ने मजबूत साक्ष्य पेश किए। थाना शहाबगंज के वर्ष 2002 के आर्म्स एक्ट मामले में बिहार निवासी जितेंद्र सिंह को दोषी पाया गया। वहीं, थाना नौगढ़ के वर्ष 2004 के मामले में स्थानीय निवासी राम सेवक चौहान को शस्त्र अधिनियम के तहत सजा सुनाई गई। माननीय न्यायालय ने इन दोनों अभियुक्तों को जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 1500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
चंदौली सदर थाने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का फैसला
थाना चंदौली (सदर) के वर्ष 2005 के गोवंश तस्करी से जुड़े एक मामले (अपराध संख्या 01/2005) में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती इशरत परवीन फारुखी ने बड़ा फैसला सुनाया। अभियुक्त ओमप्रकाश यादव, निवासी सकलडीहा, को दोषसिद्ध पाते हुए न्यायालय ने जेल में बिताई गई अवधि और न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई। साथ ही, अभियुक्त पर 5050 रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया गया है।
पुलिस टीम और मॉनिटरिंग सेल की सराहनीय भूमिका
इन सभी मामलों में अपराधियों को सजा दिलाने में चंदौली पुलिस की मॉनिटरिंग सेल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी, विजेता सिंह (पीओ), विजय कुमार पाण्डेय (एपीओ) और थानों के पैरोकारों (अमित कुमार पटेल, कोमल सिंह यादव, अजय कुमार) ने साक्षियों को समय पर न्यायालय में प्रस्तुत किया और ठोस पैरवी की।
पुलिस अधीक्षक चंदौली ने बताया कि 'ऑपरेशन कन्विक्शन' का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अपराधी कानून की गिरफ्त से बच न सके। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की गई विवेचना से सजा की दर (Conviction Rate) में सुधार हो रहा है, जिससे जिले में कानून का इकबाल बुलंद हो रहा है। इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप व्याप्त है।
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