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4 अलग-अलग आर्म्स एक्ट के मामलों में सजा, बबुरी, शहाबगंज और सकलडीहा थाने के मामले

पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे ने 'ऑपरेशन कन्विक्शन' की सफलता पर पूरी टीम की सराहना की है।
 

22 साल बाद मिली अपराधियों को सजा

चंदौली में 'ऑपरेशन कन्विक्शन' का प्रयास जारी

लंबी प्रक्रिया के बाद 4 अपराधियों को दिलाई सजा

चंदौली जिले में अपराधियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान ने अपनी सफलता का परचम लहराया है। इस अभियान के तहत, पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना, अचूक साक्ष्य संकलन और लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप चार अलग-अलग मामलों में चार अपराधियों को 20 से 22 साल बाद सजा सुनाई गई है। ये मामले साल 2003, 2004 और 2006 में दर्ज किए गए थे, जिन पर अब जाकर न्यायालयों ने अपना फैसला सुनाया है। 

आर्म्स एक्ट के मामलों में हुई दोषसिद्धि
दोषसिद्ध किए गए सभी मामले आर्म्स एक्ट (अस्त्र-शस्त्र अधिनियम) से जुड़े हैं। न्यायालय न्यायाधीश न्यायिक मजिस्ट्रेट चंदौली ने सकलडीहा थाना क्षेत्र के एक मामले में 2006 से लंबित आरोपी जय शंकर पाण्डेय को न्यायालय उठने तक की सजा और 4,000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। अर्थदण्ड न देने पर उन्हें तीन दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जय शंकर पाण्डेय पर 1 जून 2006 को धारा- 4/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मॉनिटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी, सहायक लोक अभियोजक (एपीओ) श्री विपिन कुमार और पैरोकार मुख्य आरक्षी हे0का0 हरिलाल की प्रभावी पैरवी से यह फैसला 30 सितंबर 2025 को आया। यह दर्शाता है कि पुलिस और अभियोजन पक्ष ने मिलकर दशकों पुराने मामलों को अंजाम तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है।

दो अलग-अलग आर्म्स एक्ट के मामले में सजा
न्यायालय न्यायाधीश श्री यज्ञेश कुमार सोनकर (अपर सिविल जज/जेएम, चकिया) ने तीन अन्य मामलों में फैसला सुनाया है, जिनमें से कुछ तो 22 साल पुराने हैं। थाना शहाबगंज के दो अलग-अलग आर्म्स एक्ट मामलों में आरोपी अन्तूनट और जयसवाल राम को दोषसिद्ध किया गया है। अन्तूनट का मामला 2004 का और जयसवाल राम का मामला 2003 का था। न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 1,500-1,500 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया। अर्थदण्ड न अदा करने पर उन्हें 10 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इन मामलों में एपीओ विजेयता सिंह और पैरोकार का0 अमित कुमार की पैरवी महत्वपूर्ण रही। इन फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों को लगता था कि पुराने होने के कारण उनके मामले दब जाएंगे, पर 'ऑपरेशन कन्विक्शन' ने उन्हें गलत साबित कर दिया।

बबुरी थाने के 2003 के मामले में भी सजा
न्यायालय न्यायाधीश श्री यज्ञेश कुमार सोनकर ने ही बबुरी थाना क्षेत्र के एक अन्य पुराने मामले में भी अपना फैसला सुनाया है। यह मामला 11 मई 2003 को दर्ज किया गया था, जिसमें आरोपी श्रीकान्त तिवारी को आर्म्स एक्ट के तहत दोषसिद्ध किया गया। श्रीकान्त तिवारी को भी जेल में बितायी गई अवधि की सजा के साथ 1,500 रुपये का अर्थदण्ड लगाया गया है, जिसे न भरने पर 10 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में एपीओ विजेयता सिंह और पैरोकार का0 रामनरायण की प्रभावी भूमिका रही। लगभग 22 साल बाद आया यह फैसला न केवल न्याय की जीत है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया मिलकर उसे निर्णायक अंजाम तक पहुँचा सकती है।

पुलिस अधीक्षक ने सराहा 'ऑपरेशन कन्विक्शन' का प्रयास
पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे ने 'ऑपरेशन कन्विक्शन' की सफलता पर पूरी टीम की सराहना की है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग का यह विशेष अभियान जघन्य एवं लम्बित अपराधों के मामलों में प्रभावी पैरवी कर अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए चलाया जा रहा है। इन चार फैसलों से न केवल अपराध पीड़ितों को न्याय मिला है, बल्कि यह भी स्थापित हुआ है कि चंदौली पुलिस वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलन कर पुराने और जटिल मामलों में भी दोषसिद्धि सुनिश्चित करने में सक्षम है। यह अभियान जिले में अपराधियों के मन में भय और आम जनता में विश्वास पैदा करने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रहा है। पुलिस का यह प्रयास भविष्य में भी जारी रहेगा, ताकि कोई भी अपराधी कानून के शिकंजे से बच न पाए।

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