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शहाबगंज पुलिस की मजबूत पैरवी का असर: चकिया कोर्ट ने NDPS, आर्म्स एक्ट समेत 4 मामलों के दोषियों को सुनाया फैसला

चंदौली के शहाबगंज थाने से जुड़े वर्षों पुराने चार अलग-अलग मामलों में चकिया कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पुलिस की मजबूत पैरवी और सबूतों के आधार पर अदालत ने 4 अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा और जुर्माने से दंडित किया है।

 
 

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मिली बड़ी सफलता

वर्षों पुराने मुकदमों में दोषियों को सजा

चकिया न्यायालय ने सुनाया सख्त फैसला

चंदौली पुलिस और मॉनिटरिंग सेल का सराहनीय प्रयास

 चंदौली जिले में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान को एक बार फिर बड़ी सफलता मिली है। पुलिस की मजबूत पैरवी, वैज्ञानिक जांच और ठोस सबूतों के दम पर अदालत ने शहाबगंज थाने से जुड़े चार अलग-अलग मामलों में चार अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। चकिया स्थित अपर सिविल जज (जूनियर डिविजन)/न्यायिक मजिस्ट्रेट यज्ञेश कुमार सोनकर की अदालत ने इन सभी मामलों में अपना फैसला सुनाया है।

मारपीट और नुकसान पहुंचाने के मामले में सजा

पहला मामला वर्ष 2002 का (एनसीआर नंबर 83/2002) है, जो धारा 427 और 504 के तहत दर्ज किया गया था। इसमें गोपई गांव के रहने वाले कन्हई और विजयी (दोनों पुत्र राजकुमार) को दोषी ठहराया गया। अदालत ने 6 अगस्त 2026 को दोनों को जेल में बिताई गई अवधि की सजा, अदालत उठने तक की कस्टडी और 1200-1200 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना न भरने पर 7 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

वहीं, दूसरा मामला वर्ष 2001 (एनसीआर नंबर 87/2001) का है, जो मारपीट (धारा 323, 504) से संबंधित था। इसमें कलानी गांव निवासी मुनेश्वर पुत्र शिवलोचन को दोषी पाया गया। 13 अगस्त 2026 को कोर्ट ने उसे जेल में बिताई अवधि, कोर्ट उठने तक की सजा और 800 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर 7 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।

नशीले पदार्थ और अवैध हथियार मामले में कार्रवाई

तीसरा और चौथा मामला वेनतियरी गांव के रहने वाले छोटन पुत्र रामजी सिंह से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2001 में छोटन के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (धारा 8/21) और आर्म्स एक्ट (धारा 3/25) के तहत मुकदमे दर्ज हुए थे। अदालत ने 7 अगस्त 2026 को दोनों मुकदमों में छोटन को दोषी करार दिया।

एनडीपीएस मामले में उसे जेल में बिताई गई अवधि की सजा और 1500 रुपये जुर्माने की सजा मिली (अदा न करने पर 5 दिन अतिरिक्त जेल)। वहीं आर्म्स एक्ट मामले में उसे जेल की अवधि, कोर्ट उठने तक की सजा और 1500 रुपये का जुर्माना (अदा न करने पर 3 दिन अतिरिक्त जेल) भुगतने का आदेश दिया गया।

पुलिस और अभियोजन पक्ष की भूमिका की सराहना

वर्षों पुराने इन मामलों में आरोपियों को कानून के कटघरे तक पहुंचाने में मॉनिटरिंग सेल, अभियोजन अधिकारी और शहाबगंज पुलिस की भूमिका बेहद अहम रही। पुलिस की सटीक पैरवी और मजबूत साक्ष्यों के कारण ही कोर्ट में आरोपियों का अपराध साबित हो सका। पुलिस प्रशासन का कहना है कि अपराधियों में कानून का डर कायम करने के लिए यह अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।

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