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17 मार्च का पंचांग: मंगलवार को मासिक शिवरात्रि का महापर्व, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और अमृतकाल का समय

सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। 17 मार्च को मासिक शिवरात्रि पर महादेव और माता पार्वती की कृपा पाने का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानें अमृतकाल, शुभ मुहूर्त और भद्रा के समय की सटीक जानकारी।

 

17 मार्च को मासिक शिवरात्रि व्रत

रात 11 बजे से अमृतकाल प्रारंभ

सुबह 9:23 बजे से भद्रा का साया

चतुर्दशी तिथि और साध्य योग का संयोग

राहुकाल में वर्जित रहेंगे शुभ कार्य

सनातन धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य या पूजा-पाठ से पहले पंचांग का विचार करना अनिवार्य माना जाता है। मंगलवार, 17 मार्च 2026 का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की साधना को समर्पित मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। शिव भक्तों के लिए यह दिन उपवास रखने और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए सर्वोत्तम है।

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तिथि और नक्षत्र गणना
दृक पंचांग के अनुसार, 17 मार्च को सूर्योदय सुबह 6:29 बजे और सूर्यास्त शाम 6:30 बजे होगा। तिथि की गणना करें तो कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी सुबह 9:23 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात चतुर्दशी तिथि का आरंभ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चतुर्दशी तिथि में ही मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन शतभिषा नक्षत्र अगले दिन सुबह 6:09 बजे तक प्रभावी रहेगा।

शुभ मुहूर्त और अमृतकाल
पूजा-अर्चना और नए कार्यों की शुरुआत के लिए इस दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं:

अमृतकाल: रात 11:01 बजे से देर रात 12:36 बजे तक (मंत्र जप और साधना हेतु सर्वोत्तम)।

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:53 से 5:41 बजे तक।

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:54 बजे तक।

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:18 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:28 से 6:52 बजे तक।

भद्रा और अशुभ समय का ध्यान रखें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा काल में शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है। 17 मार्च को भद्रा सुबह 9:23 बजे शुरू होकर रात 8:59 बजे तक रहेगी। इसके अलावा अन्य अशुभ समय इस प्रकार हैं:

राहुकाल: दोपहर 3:30 से शाम 5:00 बजे तक।

यमगंड: सुबह 9:29 से 10:59 बजे तक।

गुलिक काल: दोपहर 12:30 से 2:00 बजे तक।

विशेष: इस दिन पञ्चक और आडल योग पूरे दिन प्रभावी रहेंगे, अतः सावधानी पूर्वक कार्यों का चयन करें।

मासिक शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और दूध अर्पित करना विशेष फलदायी होता है। श्रद्धालु शुभ मुहूर्त का लाभ उठाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकते हैं।

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