कन्या राशि में चंद्रमा का गोचर, जानें अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और अमृतकाल का सटीक समय
9 अक्टूबर 2026 आश्विन कृष्ण चतुर्दशी तिथि
कन्या राशि में चंद्रमा और सूर्य का गोचर
दोपहर 11:50 से 12:37 तक अभिजीत मुहूर्त
रात 11:19 बजे तक अत्यंत शुभ ब्रह्म योग
सुबह 10:46 से 12:14 बजे तक रहेगा राहुकाल
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम, पूजा-पाठ, निवेश या यात्रा की शुरुआत से पहले पंचांग देखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति पर आधारित काल-गणना पद्धति है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 9:36 बजे तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। इस दिन सुबह 6:25 बजे सूर्योदय और शाम 6:03 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, तड़के 4:55 बजे चंद्रोदय और शाम 5:11 बजे चंद्रास्त होगा।
हस्त नक्षत्र और ब्रह्म योग का प्रभाव
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। सूर्य का हस्त नक्षत्र में प्रवेश सभी 12 राशियों पर प्रभाव डालता है। इसके अलावा, शुक्रवार को रात 11:19 बजे तक 'ब्रह्म योग' रहेगा। 27 नित्य योगों में 25वां यह योग ज्ञान, बुद्धि और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। इस योग में किए गए कार्य अत्यंत फलदायी और सकारात्मक परिणाम देने वाले होते हैं।
शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ 48 मिनट का समय होता है, जिसमें किए गए कार्यों के सभी दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं।
अमृतकाल: दोपहर 2:07 से 3:43 बजे तक रहेगा। यह सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समय है, जो नए व्यापार, निवेश और महत्वपूर्ण यात्राओं के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
अशुभ मुहूर्त: राहुकाल, गुलिक और यमगंड काल
राहुकाल: सुबह 10:46 से दोपहर 12:14 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
गुलिक काल: सुबह 7:52 से 9:19 बजे तक रहेगा। इस समय में बैंक में पैसे जमा करना या दान देना शुभ माना जाता है, लेकिन नया काम शुरू न करें।
यमगंड काल: दोपहर 3:08 से 4:35 बजे तक रहेगा। यह यमराज से जुड़ा समय है, इसलिए इस दौरान यात्रा करने और लेन-देन से बचना चाहिए।
ग्रह स्थिति और दिशाशूल
9 अक्टूबर को सूर्य और चंद्रमा दोनों ही कन्या राशि में स्थित रहेंगे। कन्या राशि में चंद्रमा के होने से व्यक्ति का मन विश्लेषणात्मक और संवेदनशील रहता है। शुक्रवार के दिन दिशाशूल 'पश्चिम' दिशा में रहेगा, इसलिए इस दिशा में अनावश्यक यात्रा करने से बचना चाहिए।
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