धन्नीपुर में भक्ति की बयार: श्रीमद्भागवत कथा में बोले व्रजराज दास जी महाराज- भक्ति और सत्संग से ही संवरता है मानवीय जीवन
चंदौली के धन्नीपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वृंदावन के सुप्रसिद्ध कथावाचक व्रजराज दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन की नश्वरता और भक्ति की शक्ति से परिचित कराया। उन्होंने विनम्रता और सेवा भाव को सच्ची ईश्वर भक्ति बताया।
धन्नीपुर गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा
वृंदावन के व्रजराज दास जी महाराज का प्रवचन
सत्संग से मन के विकार दूर करने का आह्वान
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ली भक्ति रस की डुबकी
चंदौली जनपद के चकिया तहसील अंतर्गत धन्नीपुर गांव में इन दिनों अध्यात्म की गंगा बह रही है। राधा-कृष्ण सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वृंदावन से पधारे प्रख्यात कथावाचक पूज्य व्रजराज दास जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भक्तों को भक्ति, सत्संग और सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
दुर्लभ है मानव तन, भक्ति ही है असली धन
कथा के मुख्य प्रसंगों की व्याख्या करते हुए महाराज जी ने कहा कि चौरासी लाख योनियों के बाद प्राप्त होने वाला यह मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और अनमोल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं का संचय करना नहीं है, बल्कि भगवान की अनन्य भक्ति और दीन-दुखियों की सेवा करना है। महाराज जी के अनुसार, श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है और उसे जीवन जीने की सही कला सिखाता है।
सत्संग से दूर होते हैं मन के विकार
महाराज जी ने सत्संग की महिमा बताते हुए कहा कि जिस प्रकार अग्नि के संपर्क में आने से लोहा भी तपने लगता है, उसी प्रकार सत्संग में बैठने से मनुष्य के भीतर के काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकार स्वतः ही शांत होने लगते हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि भगवान केवल भक्त के हृदय की कोमल भावना और उसकी सच्ची श्रद्धा देखते हैं। जो व्यक्ति अहंकार का त्याग कर विनम्रता अपनाता है, वही प्रभु की कृपा का पात्र बनता है।
संस्कारित परिवार से ही बनेगा मजबूत समाज
कथा के दौरान महाराज जी ने सामाजिक संदेश देते हुए श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपने परिवारों में संस्कार और प्रेम का वातावरण बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि घर में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और बड़ों के प्रति आदर का भाव रहेगा, तो आने वाली पीढ़ी भी संस्कारित होगी और एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण होगा। दूसरों के कष्ट में भागीदार बनना और समाज कल्याण के कार्यों में आहुति देना ही सच्ची ईश्वर आराधना है।
भजन-कीर्तन के साथ हुआ आरती का आयोजन
कथा के समापन पर संगीतमय भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु झूमते नजर आए। अंत में भगवान की आरती के बाद प्रसाद वितरण हुआ, जहाँ भक्तों ने क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की मंगल कामना की। इस धार्मिक अनुष्ठान में त्यागी जी महाराज, रामस्वारथ यादव, संजू यादव, निर्मला देवी, प्रमिला देवी, बल्लू यादव, सिपाही यादव, हवलदार यादव, दिनेश यादव, राजेश विश्वकर्मा, संजय सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
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