हिंदुस्तान की तहज़ीब और इमाम हुसैन की कुर्बानी इंसानियत के लिए मिसाल: मौलाना जाफर रिजवी
अज़ाखाना-ए-रज़ा में सातवीं मुहर्रम की मजलिस आयोजित
इमाम हुसैन की कुर्बानी को बताया इंसानियत की मिसाल
अंजुमन-ए-हाशमिया के अनवर साहब ने पढ़े दर्दभरे नौहे
बुधवार को निकाला जाएगा परंपरागत दुलदुल का जुलूस
विपत्तियां और संघर्ष इंसान को श्रेष्ठ बनाते हैं
चंदौली नगर स्थित अज़ाखाना-ए-रज़ा में मुहर्रम की सातवीं मजलिस का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। मजलिस को खिताब फरमाते हुए प्रख्यात विद्वान मौलाना जाफर रिजवी ने कहा कि इंसान के जीवन में आने वाली विपत्तियां और कठिन परिस्थितियां ही उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो व्यक्ति सच्चाई और अपने सिद्धांतों के लिए हर तरह का त्याग करने को तैयार रहता है, वही श्रेष्ठता को प्राप्त करता है।
करबला का संदेश पूरी इंसानियत के लिए मौलाना जाफर रिजवी ने ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि लगभग चौदह सौ वर्ष पहले इमाम हुसैन ने करबला के मैदान में इंसानियत, न्याय और हक की रक्षा के लिए महान कुर्बानी पेश की थी। यही कारण है कि आज भी पूरी दुनिया उन्हें बेहद श्रद्धा के साथ याद करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि करबला का संदेश किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए है। इमाम हुसैन ने अत्याचार के सामने झुकने के बजाय सत्य का मार्ग चुनकर दुनिया को सिद्धांतों पर अडिग रहने का पाठ पढ़ाया।
भारतीय संस्कृति और भाईचारे की सराहना अपने संबोधन में मौलाना ने हिंदुस्तान की गौरवशाली सभ्यता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान सदियों से आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना पर आधारित रही है। यह देश हमेशा से विश्व को शांति का संदेश देता आया है। मजलिस के बाद बनारस से पधारे प्रसिद्ध नौहाख्वान अनवर साहब (अंजुमन-ए-हाशमिया) ने अत्यंत दर्दभरे नौहे पढ़े, जिससे अज़ादारों की आँखें नम हो गईं। इसके अलावा सिकंदरपुर की अंजुमन अब्बासिया के बच्चों, मिर्जापुर के मौलाना शहंशाह और लखनऊ के शायर वकार सुल्तानपुरी ने भी कलाम पेश किए।
बुधवार को निकलेगा दुलदुल का पारंपरिक जुलूस अज़ाखाना-ए-रज़ा के प्रबंधक डॉ. एस.जी. इमाम ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि मुहर्रम की आठवीं तारीख यानी बुधवार को पारंपरिक दुलदुल का जुलूस निकाला जाएगा। इस जुलूस में नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में अज़ादार शामिल होकर करबला के शहीदों को अपनी अकीदत पेश करेंगे। इस अवसर पर डॉ. सैयद गजन्फर इमाम, सरवर, साजिद, शाहिद बनारसी, सफदर अली, मुस्तफा, कौसर अली और रेयाज अहमद सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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