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निर्जला एकादशी पर आस्था का सैलाब: पश्चिम वाहिनी गंगा तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

चहनियां क्षेत्र के बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनी गंगा तट पर निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। भोर से ही श्रद्धालुओं ने बिना जल ग्रहण किए व्रत रखकर गंगा स्नान किया और दान-पुण्य कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
 
पश्चिम वाहिनी मां भागीरथी गंगा तट पर उमड़ी भारी भीड़

बिना जल ग्रहण किए श्रद्धालुओं ने रखा बेहद कठिन व्रत

पूरे वर्ष की 24 एकादशियों का पुण्य दिलाता है यह व्रत

महाभारत काल में महर्षि वेदव्यास ने भीम को बताया था उपाय

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बलुआ थाना पुलिस घाट पर रही मुस्तैद

निर्जला एकादशी के पावन और पावन अवसर पर बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनी पतित पावनी मां भागीरथी गंगा के आंचल में गुरुवार को भोर से ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। क्षेत्र सहित दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा नदी में श्रद्धा और विश्वास की डुबकी लगाई। पावन स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने गंगा तट और आसपास के मंदिरों में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा भिक्षुओं व जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य के भागी बने। गंगा नदी में स्नान करने का यह सिलसिला भोर की पहली किरण के साथ शुरू होकर देर दोपहर तक निरंतर चलता रहा।

बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने का है विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर गंगा स्नान और दान-पुण्य करने का एक बहुत बड़ा और विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए बेहद कठिन व्रत रखकर मां गंगा की शरण में पहुंचते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में भीम को भूख अत्यधिक लगती थी, जिसके कारण वे वर्ष की सभी एकादशियों का व्रत रख पाने में असमर्थ थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें केवल इस एक कठोर निर्जला एकादशी व्रत को रखने का उपाय सुझाया था, जिसे पूरा करके भीम ने संपूर्ण एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त किया था। यही वजह है कि इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है, जिससे भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।

क्षेत्र के दर्जनों गांवों से पहुंचे श्रद्धालु
इस पवित्र अवसर पर चहनियां क्षेत्र के महडौ़रा, कांवर, महुआरी, सराय, बलुआ, हरधन जुड़ा, पुराविजयी, सोनबरसा, टांडा कला, तिरगावा, हसनपुर, बढ़गावा और नादी निधौरा सहित दर्जनों गांवों के श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। स्नान के बाद लोगों ने ऋतु फल, मटका, पंखा और अनाज का दान किया, जिसे इस एकादशी पर अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद रहा प्रशासन
गंगा नदी में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनकी पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया। बलुआ थाना अध्यक्ष स्वयं भारी पुलिस बल, महिला कांस्टेबलों और स्थानीय गोताखोरों की टीम के साथ गंगा घाट पर लगातार चक्रमण करते रहे। गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए घाटों पर सुरक्षा घेरा बनाया गया था। पुलिस की मुस्तैदी के कारण पूरा स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न हो गया।

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