सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया: जानें सूतक काल की टाइमिंग और कहां-कहां दिखेगा 'ब्लड मून'
28 अगस्त को साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। रक्षाबंधन के दिन लगने वाला यह गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण तांबे जैसे लाल रंग का दिखाई देगा। जानिए भारत में इसके दिखने और सूतक काल की पूरी जानकारी...
28 अगस्त को लगेगा अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण
रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा के दिन खगोलीय घटना
भारत में दिन के समय होने से नहीं दिखेगा ग्रहण
भारत में मान्य नहीं होगा सूतक काल
करीब 3 घंटे 18 मिनट रहेगा आंशिक चरण
खगोल प्रेमियों के लिए 28 अगस्त का दिन बेहद खास रहने वाला है। इस दिन साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा का एक बड़ा हिस्सा पृथ्वी की काली छाया से पूरी तरह ढक जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि इसी दिन सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार भी मनाया जाएगा। त्योहार के दिन खगोलीय घटना होने से लोगों के मन में सूतक काल को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

जानिए क्या है ग्रहण का समय और टाइमिंग
भारतीय समयानुसार यह चंद्र ग्रहण सुबह 6:53 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा। ग्रहण का मुख्य आंशिक चरण सुबह 8:04 बजे से 11:22 बजे तक रहेगा। ग्रहण के दौरान सुबह 9:43 बजे 'परमग्रास' की स्थिति बनेगी, जब ग्रहण अपने सबसे चरम रूप में होगा। इस आंशिक चंद्र ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 18 मिनट की रहने वाली है।
भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण, सूतक काल भी मान्य नहीं
भारत के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि यह ग्रहण दिन के समय लगेगा। सूर्य के उजाले और दिन का समय होने के कारण यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में दिखाई न देने की वजह से यहां इसका कोई धार्मिक प्रभाव या 'सूतक काल' मान्य नहीं होगा। इसलिए लोग बिना किसी चिंता के रक्षाबंधन का पर्व सामान्य रूप से मना सकेंगे। यह ग्रहण उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।
क्यों लाल रंग का दिखाई देगा चंद्रमा?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा का करीब 93 से 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा। इसके कारण आसमान में चंद्रमा तांबे जैसा गहरा लाल यानी 'ब्लड मून' के रूप में नजर आ सकता है। पूर्ण या गहरे चंद्र ग्रहण के दौरान जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरता है, तो उसमें लाल रंग का प्रकाश सबसे अधिक प्रभावी होकर चंद्रमा तक पहुंचता है। इसी वजह से चंद्रमा लाल दिखाई देता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य ग्रहण के विपरीत चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष चश्मे या सुरक्षा उपकरण की जरूरत नहीं होती।
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