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Darsh Amavasya 2026: 18 मार्च को दर्श अमावस्या, पितृ दोष मुक्ति के लिए नोट करें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

18 मार्च को दर्श अमावस्या पर पितृ तर्पण और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन जहाँ अमृतकाल और विजय मुहूर्त जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं, वहीं पूरे दिन पंचक भी प्रभावी रहेगा। जानें सटीक समय और शुभ-अशुभ काल।

 
 

18 मार्च को सुबह 8:25 से अमावस्या तिथि प्रारंभ

पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए विशेष फलदायी दिन

रात 9:37 से 11:10 तक रहेगा अमृत काल

बुधवार को पूरे दिन पंचक का साया रहेगा प्रभावी

राहुकाल के दौरान मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस वर्ष 18 मार्च को 'दर्श अमावस्या' मनाई जाएगी। शास्त्रों में 'दर्श' का अर्थ दर्शन करने से है, और चूंकि इस तिथि पर चंद्रमा अदृश्य रहता है, इसलिए इसे दर्श अमावस्या कहा जाता है। यह दिन मुख्य रूप से पितरों की आराधना, श्राद्ध और तर्पण के लिए समर्पित माना जाता है।

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पितृ दोष से मुक्ति और धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितर पृथ्वी लोक के निकट होते हैं। इस दिन उन्हें जल अर्पण और तिल का दान करने से उनकी आत्मा को परम शांति प्राप्त होती है। ज्योतिषियों का मानना है कि जो लोग पितृ दोष से ग्रसित हैं, उनके लिए दर्श अमावस्या पर विशेष पूजा-अर्चना करना सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। दान-पुण्य करने से आने वाली पीढ़ियों के कष्ट भी दूर होते हैं।

तिथि और शुभ मुहूर्त का गणित
दृक पंचांग के अनुसार, 18 मार्च को सूर्योदय सुबह 6:28 बजे और सूर्यास्त शाम 6:31 बजे होगा। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 8:25 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन शुभ योग सुबह 4:01 बजे से शुरू होकर अगले दिन 19 मार्च तक रहेगा।

महत्वपूर्ण शुभ समय:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:40 तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:18 तक

अमृत काल: रात 9:37 से 11:10 तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:29 से 6:53 तक

पंचक और वर्जित समय (सावधानी)
18 मार्च, बुधवार को पूरे दिन पंचक प्रभावी रहेगा, जिससे कुछ विशेष कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। साथ ही, इस दिन अभिजित मुहूर्त का अभाव रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12:29 से 2:00 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। अन्य अशुभ समयों में यमगंड सुबह 7:58 से 9:28 तक और गुलिक काल सुबह 10:59 से दोपहर 12:29 तक प्रभावी रहेगा।

नक्षत्र और योग
इस दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र सुबह 5:21 तक रहेगा, जिसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। करण शकुनि सुबह 8:25 तक रहेगा। अमावस्या की शाम को दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाना और पीपल के वृक्ष की सेवा करना पितरों की प्रसन्नता के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

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