हरतालिका तीज 2025 : आस्था और श्रद्धा का उत्सव, संगम में महिलाओं ने लगाई पुण्य की डुबकी
प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम तट पर महिलाओं की डुबकी
मंगलवार सुबह श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा
पारंपरिक वेशभूषा में संगम घाट पर एकत्रित हुईं महिलाएं
हरतालिका तीज के पावन अवसर पर प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम तट पर मंगलवार सुबह श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त से ही हजारों महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में संगम घाट पर एकत्रित हुईं और आस्था की डुबकी लगाई। गंगा स्नान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
हरतालिका तीज का पर्व विशेष रूप से सुहागन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है, जो पति की लंबी उम्र, वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और संतान की मंगलकामना के लिए यह निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखा जाता है।
गंगा स्नान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज पर गंगा जैसे पवित्र नदियों में स्नान करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। संगम तट पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यही कारण है कि दूर-दूर से आई महिलाएं इस दिन स्नान कर अपने व्रत को सफल बनाने के लिए प्रयागराज पहुंचती हैं।

स्थानीय निवासी ने कहा, "हरतालिका तीज का व्रत हमारे परिवार की खुशहाली और पति की दीर्घायु के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। संगम में स्नान करने से आत्मिक शांति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।"
वहीं, महिला श्रद्धालु ने बताया, "मैंने आज भोलेनाथ और गंगा मैया से अपने अखंड सौभाग्य, पति और परिवार की रक्षा के लिए प्रार्थना की है। यहां आकर मन को विशेष शांति मिलती है।"
तीर्थ पुरोहितों ने बताया महत्व
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने गंगा स्नान और व्रत के धार्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा, "हरतालिका तीज पर गंगा स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यह पर्व महिलाओं के त्याग, प्रेम और भक्ति का प्रतीक है।" उन्होंने यह भी कहा कि "पुरुषों को चाहिए कि इस दिन अपनी पत्नियों के त्याग का सम्मान करें और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करें।"
भक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक
हरतालिका तीज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। प्रयागराज के संगम तट पर अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों से आई महिलाएं एक साथ एक ही उद्देश्य से एकत्र हुईं—अपनी आस्था को समर्पित करना। इससे सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना भी मजबूत होती है।
हरतालिका तीज का पर्व भारतीय संस्कृति में स्त्री शक्ति, त्याग और भक्ति का जीवंत उदाहरण है। प्रयागराज के संगम पर गूंजते भजन, श्रद्धालु महिलाओं की आस्था और गंगा में लगाई गई डुबकी इस बात का प्रमाण हैं कि आज भी हमारी परंपराएं जीवित हैं और आधुनिक युग में भी गहराई से लोगों के जीवन का हिस्सा बनी हुई हैं।
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