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हर्षोल्लास के साथ मनाया गया जीवित्पुत्रिका व्रत, क्षेत्र में महिलाओं ने की पुत्र की रक्षा की कामना
यह व्रत संतान के रक्षा के लिए रखा जाता है। महिलाएं इस दिन संतान की सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य के लिए पूरा दिन निर्जल व्रत रखती हैं। इस व्रत के संबंध में भगवान शंकर ने माता पार्वती को बताया था कि यह व्रत संतान की सुरक्षा के लिए किया जाता है।
 

 

 चंदौली जिले के शहाबगंज इलाके में जीवित्पुत्रिका व्रत बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। गांव की महिलाओं ने नदी, सरोवर, मंदिर परिसर में पहुंच कर पूजा पाठ किया। दोपहर में महिलाओं ने जहां प्रसाद बनाकर तैयारी की तो वहीं पुरुषों ने बाजार जाकर फल की खरीदारी की। शाम होते ही व्रती महिलाओं ने गाजे बाजे के साथ पूजी स्थल पर जा पहुंची। 

कहा जा रहा है कि इसके लिए परिजन पूजा की थाल लेकर घाटों पर पहुंच पूजा अर्चन में भाग लिया। गोठ बनाकर बैठी महिलाओं ने गीत व कथा के साथ  पूजा को सम्पन्न किया। चारों तरह भक्तिमय वातावरण था। 

jivitputrika vrat

आपको बता दें कि जीवित्पुत्रिका पर्व अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इसे जितिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत संतान के रक्षा के लिए रखा जाता है। महिलाएं इस दिन संतान की सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य के लिए पूरा दिन निर्जल व्रत रखती हैं। इस व्रत के संबंध में भगवान शंकर ने माता पार्वती को बताया था कि यह व्रत संतान की सुरक्षा के लिए किया जाता है। इस व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा है, जो जिमूतवाहन से जुड़ी है। सत्य युग में गंधर्वों के एक राजकुमार थे, जिनका नाम जिमूतवाहन था। वे सद्आचरण, सत्यवादी, बडे उदार और परोपकारी थे। जिमूतवाहन को राजसिंहासन पर बिठाकर उनके पिता वन में वानप्रस्थी का जीवन बिताने चले गए। जिमूतवाहन का राज-पाट में मन नहीं लगता था। वे राज-पाट की जिम्मेदारी अपने भाइयों को सौंप पिता की सेवा करने के उद्देश्य से वन में चल दिए। वन में ही उनका विवाह मलयवती नाम की कन्या के साथ हो गया।

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