जीवित्पुत्रिका व्रत : 3 अक्टूबर होगा व्रत, जानें नहाय-खाय से पारण तक का पूरा शेड्यूल, पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण टाइम
3 अक्टूबर 2026 को है जितिया व्रत
24 घंटे से अधिक का निर्जला उपवास
4 अक्टूबर सुबह 7:28 बजे पारण
जीमूतवाहन की कुशा से बनी मूर्ति पूजा
संतान की लंबी आयु का महापर्व
जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया या जिउतिया भी कहते हैं, माताओं के लिए बहुत कठिन और पवित्र व्रत है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। यह पर्व मुख्य रूप से यूपी, बिहार, झारखंड और नेपाल के तराई इलाकों में मनाया जाता है। हर साल यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल 2026 में यह व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा।

तीन दिन का होता है यह व्रत
यह व्रत पूरे तीन दिनों तक चलता है। पहला दिन 2 अक्टूबर, शुक्रवार को नहाय-खाय है। इस दिन से व्रत की शुरुआत होती है। माताएं नदी में स्नान करके सात्विक भोजन करती हैं। कई जगहों पर इस दिन तोरई की सब्जी और मड़ुआ खाने की परंपरा है। दूसरा दिन 3 अक्टूबर, शनिवार को मुख्य व्रत है। अष्टमी तिथि सुबह 07:59 बजे से शुरू होगी। इसी दिन माताएं 24 घंटे से भी ज्यादा समय तक बिना पानी और खाने के निर्जला व्रत रखेंगी। तीसरा दिन 4 अक्टूबर, रविवार को पारण होगा। इस दिन सुबह 07:28 बजे के बाद व्रत खोला जाएगा।
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
जितिया की पूजा शाम के समय की जाती है। 2026 में पूजा का सबसे अच्छा समय शाम 06:05 बजे से रात 08:29 बजे तक है। पूजा में कुशा से बनी जीमूतवाहन की मूर्ति स्थापित की जाती है। उन्हें धूप, दीप, फल, फूल, सरसों का तेल और खली चढ़ाई जाती है। साथ ही चील और सियारिन की मिट्टी की मूर्ति बनाकर सिंदूर लगाया जाता है। माताएं एक साथ कथा सुनती हैं और बच्चों की रक्षा के लिए जितिया का धागा पहनती हैं।
व्रत की पौराणिक कथा
कथा के अनुसार जीमूतवाहन ने गरुड़ से नागों की रक्षा के लिए खुद को समर्पित कर दिया था। उनकी इस बहादुरी से प्रसन्न होकर गरुड़ ने नागों को न खाने का वादा किया। इसलिए माताएं जीमूतवाहन को रक्षा का देवता मानकर पूजती हैं।
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