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नवरात्रि के तीसरे दिन भक्ति और उत्साह का माहौल, सुनायी दे रहे भक्तों के जयकारे

मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो माँ के दर्शन के लिए फूल, नारियल, जल और प्रसाद लेकर पहुँचे हैं। श्रद्धालु अपने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना कर रहे हैं।
 

नवरात्रि के तीसरे दिन  माँ चंद्रघंटा की पूजा

आंतरिक शक्ति, शांति और सुरक्षा के लिए पूजा जरुरी

घर-परिवार में आती है सुख-समृद्धि

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन भक्ति और उत्साह का माहौल अपने चरम पर है। बुधवार को माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना के लिए जिले के प्राचीन मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों के जयकारे और देवी गीतों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। धार्मिक आयोजन की यह भव्यता न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक रूप से भी इसका गहरा महत्व है।

आस्था और सुरक्षा का संगम
मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो माँ के दर्शन के लिए फूल, नारियल, जल और प्रसाद लेकर पहुँचे हैं। श्रद्धालु अपने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और भक्तों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो। ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों का उत्साह देखने लायक है।

पुजारी ने कहा कि आज माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है। साथ ही कहा कि उनकी साधना से भक्तों के जीवन से दुख, दरिद्रता और भय दूर हो जाते हैं। माँ का यह स्वरूप सौम्यता और शांति का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन पूजा करने से साधक को अलौकिक शक्ति प्राप्त होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

इस प्रकार, नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना हमें आंतरिक शक्ति, शांति और सुरक्षा प्रदान करती है।

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