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मासिक शिवरात्रि पर ऐसे करेंगे पूजा तो प्रसन्न होंगे भोलेनाथ, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व व्रत कथा

भगवान शिव की पूजा का विशेष दिन होता है मासिक शिवरात्रि जो हर महीने कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है।

 

भगवान शिव की पूजा का विशेष दिन होता है मासिक शिवरात्रि जो हर महीने कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इसी तरह भाद्रपद मास में 5 सितंबर रविवार को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। मासिक शिवरात्रि पर विधि-विधान से भगवान शिव-शंकर की पूजा-अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है

भगवान शिव की पूजा का विशेष दिन होता है मासिक शिवरात्रि जो हर महीने कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इसी तरह भाद्रपद मास में 5 सितंबर रविवार को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। मासिक शिवरात्रि पर विधि-विधान से भगवान शिव-शंकर की पूजा-अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है और भक्त को मनचाहा फल मिलता है। 

मासिक शिवरात्रि पर भक्तजन पूजा के साथ ही व्रत भी रखते हैं साथ ही भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करके व्रत कथा सुनते हैं। भोलेनाथ को प्रसन्न करने का विशेष दिन होता है मासिक शिवरात्रि और इस दिन पूजा के साथ ही व्रत कथा सुनने से भक्तों की सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उन पर शिव कृपा बरसने लगती है। 

मासिक शिवरात्रि पूजन का शुभ मुहूर्त 

भाद्रपद, कृष्ण चतुर्दशी प्रारम्भ - 08:21 ए एम, सितम्बर 05
भाद्रपद, कृष्ण चतुर्दशी समाप्त - 07:38 ए एम, सितम्बर 06

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:30 से 5:15 तक
अभिजित मुहूर्त- 11:55 से 12:45 तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 2:26 से 03:17 तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 6:26 से 06:51 तक
अमृत काल- दोपहर 11:05 से 12:45 तक
निशिता मुहूर्त- 11:57 से 12:43 तक  

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ये रही मासिक शिवरात्रि पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट 

पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि।

मासिक शिवरात्रि पर यूं करें पूजा 

- इसदिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
- इस समय कोरोना महामारी की वजह से घर में ही भोलेनाथ की पूजा- अर्चना करना ठीक रहेगा।
- सबसे पहले घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
 - अगर घर में शिवलिंग है तो शिवलिंग का गंगा जल, दूध, आदि से अभिषेक करें।
- भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की पूजा अर्चना भी करें।
- भोलेनाथ का अधिक से अधिक ध्यान करें।
- ऊॅं नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
- भगवान भोलेनाथ को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
- भगवान की आरती करना न भूलें।

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पूजा के बाद सुनें ये व्रत कथा

शास्त्रो के अनुसार मासिक शिवरात्रि पर पूजा के साथ ही व्रत कथा के पढ़ने और सुनने भर से ही जीवन की समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। मासिक शिवरात्रि की कथा का जिक्र पुराणों में मिलता है।

 पौराणिक कथा के अनुसार चित्रभानु नाम का एक शिकारी साहूकार का कर्जदार था। वो अपने परिवार का पालन पोषण जंगल में जानवरों का शिकार करके करता था। साहूकार का समय से कर्ज न चुका पाने के कारण साहूकार ने उसे बंदी बनाकर शिवमठ में डाल दिया। उस दिन शिवरात्रि होने के कारण मठ में शिवरात्रि की व्रत कथा हो रही थी।

शिकारी ने वो कथा बहुत ही ध्यान से सुनी। साहूकार द्वारा शाम को शिकारी से ऋण के बारे में पूछने पर उसने अगले दिन सारा ऋण देने की बात कही। शिकारी की ये बात सुनकर साहूकार ने उसे मुक्त कर दिया। शिकारी बंदी बने होने कारण उस समय काफी भूखा था। वो जंगल में शिकार के इंतजार में बैठा रहा, लेकिन अंधेरा होने के कारण उसे कुछ न मिल सका।

 शिकारी तालाब के किनारे शिवलिंग के पास एक बेल के पेड़ पर चढ़ कर रात बीतने का इंतजार करने लगा। पड़ाव बनाते समय शिवलिंग पर ढेर सारे बेलपत्र टूटकर शिवलिंग पर गिरते गए। इस प्रकार अनजाने में दिनभर उनका व्रत हो गया, रात काटने के इंतजार में उसने शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ा दिए और रात्रि जागरण भी हो गया।

रात का एक पहर बीत जाने के बाद उसे गर्भिणी हिरणी दिखाई दी, लेकिन हिरणी के निवेदन पर शिकारी ने उसे छोड़ दिया, इसके बाद निवृत्त हिरणी और फिर बच्चों के साथ हिरणी आई लेकिन उसने सभी के निवेदन पर उन्हें छोड़ दिया।  इस तरह शिकारी का पूरी रात का उपवास हो गया।

 इसके बाद सुबह के समय उसे एक मृग दिखाई दिया। उसने मृग का शिकार करने का फैसला किया लेकिन मृग ने शिकारी से कहा कि अगर तुम मुझ से पहले तीनों हिरणियों का शिकार किया होता, तो मेरा भी शिकार कर लेते परंतु अगर आपने उनको जीवन दान दिया है तो मुझे भी जीवनदान दे दो।

 शिकारी ने मृग को भी छोड़ दिया। इस प्रकार सुबह हो गई. शिवरात्रि पर उपवास, रात्रि जागरण, शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से अनजाने में ही सही पर शिकारी का शिवरात्रि का व्रत पूर्ण हो गया और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।