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सुख-शांति और मोक्ष का दुर्लभ संयोग : पद्मनाभ द्वादशी के साथ आज रखा जा रहा है 'शनि प्रदोष व्रत'

चूँकि द्वादशी तिथि (सायं 5 बजकर 9 मिनट तक) के बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ हो जाएगा और यह शनिवार का दिन है, इसलिए इस दिन शनि प्रदोष व्रत भी मनाया जाएगा।
 

आश्विन मास का शुक्ल पक्ष का खास दिन

पद्मनाभ द्वादशी और शनि प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग

धन-संपदा और मोक्ष की प्राप्ति के लिए करें ये उपाय

आश्विन मास का शुक्ल पक्ष बेहद खास धार्मिक अनुष्ठानों का साक्षी बन रहा है। इस बार शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि शनिवार के दिन पड़ रही है, जिसके कारण यह दिन दो अत्यंत महत्वपूर्ण व्रतों का संगम बन गया है—पद्मनाभ द्वादशी और शनि प्रदोष व्रत। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे, जो इस संयोग को और भी शुभकारी बना रहा है।

पद्मनाभ द्वादशी: धन-संपदा और मोक्ष की प्राप्ति
पद्मनाभ द्वादशी, जिसे पापांकुशा एकादशी के ठीक अगले दिन मनाया जाता है, भगवान विष्णु के 'पद्मनाभ' स्वरूप की विधिवत पूजा के लिए समर्पित है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान विष्णु की नाभि से ही कमल उत्पन्न हुआ था, जिससे ब्रह्मा जी का जन्म हुआ।

इस व्रत को करने से साधक को धन-संपदा, सुख-शांति और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह दिन नया व्यवसाय शुरू करने, निवेश करने या किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन व्रती भगवान विष्णु को तुलसी पत्र, कमल पुष्प और नैवेद्य अर्पित करते हैं।

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शनि प्रदोष व्रत: शनि दोष और संकटों से मुक्ति
चूँकि द्वादशी तिथि (सायं 5 बजकर 9 मिनट तक) के बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ हो जाएगा और यह शनिवार का दिन है, इसलिए इस दिन शनि प्रदोष व्रत भी मनाया जाएगा। यह व्रत चंद्र मास की दोनों त्रयोदशी तिथियों को किया जाता है और शनिवार को पड़ने के कारण इसे विशेष रूप से शनि प्रदोष कहा जाता है।

यह व्रत सभी प्रकार के संकटों और बाधाओं से मुक्ति दिलाने के लिए जाना जाता है। प्रदोष व्रत, जो भगवान शिव को समर्पित है, शनि ग्रह से संबंधित दोषों, कालसर्प दोष और पितृ दोष के निवारण के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के पालन से भगवान शिव की कृपा से सभी ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है और शनि देव की कृपा से कर्मबन्धन काटने में मदद मिलती है।

इस दिन सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में शिवलिंग की पूजा, शनि मंत्रों का जाप और तिल-तेल का दान-पुण्य करने का विधान है।

शुभ-अशुभ मुहूर्त
इस खास दिन पर शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। वहीं, राहुकाल सुबह 9 बजकर 13 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

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