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आज है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: जानिए पूजा का सही शुभ मुहूर्त, रासलीला और व्रत पारण का समय

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। जानिए इस साल 4 सितंबर को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत पारण का सही समय।
 

जन्माष्टमी की सही तारीख और अष्टमी तिथि

निशिता काल पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त

कान्हा के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा

जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री भोग का महत्व

हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का त्योहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए पूरे नियम-धर्म से व्रत रखते हैं और कान्हा की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने कान्हा के रूप में धरती पर जन्म लिया था।

जन्माष्टमी की सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 सितंबर की रात 02:25 बजे से शुरू हो रही है, जो 4 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि और शास्त्रों के नियमों के अनुसार जन्माष्टमी का त्योहार 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

पूजा के लिए सबसे खास माना जाने वाला 'निशिता काल' मुहूर्त 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से लेकर देर रात 12:43 बजे तक रहेगा। वहीं जो लोग पूरे दिन का उपवास रखते हैं, वे अगले दिन यानी 5 सितंबर को सुबह 06:01 बजे के बाद अपना व्रत खोल (पारण कर) सकते हैं।

घर पर कैसे करें बाल गोपाल की पूजा?
जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और देवी-देवताओं का ध्यान करके दिन की शुरुआत करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर पूजा घर की अच्छे से सफाई करके एक साफ चौकी लगाएं और उस पर बाल गोपाल की मूर्ति स्थापित करें।

अब कान्हा का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें गोपी चंदन का तिलक लगाएं, सुंदर वस्त्र पहनाकर श्रृंगार करें और ताजे फूलों की माला पहनाएं। इसके बाद देशी घी का दीपक जलाकर आरती करें। भगवान को उनकी पसंदीदा चीज यानी माखन-मिश्री, ताजे फल और मिठाइयों का भोग लगाएं। अंत में सभी को प्रसाद बांटें।

क्यों मनाई जाती है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में माता देवकी और वासुदेव के घर हुआ था। देवकी का भाई कंस बहुत अत्याचारी राजा था। एक आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी। इस डर से कंस ने अपनी बहन और बहनोई को कैद में डाल दिया था और उनके बच्चों को मारता रहा।

जब देवकी ने अपनी आठवीं संतान के रूप में कृष्ण को जन्म दिया, तब भगवान की कृपा से जेल के सभी सिपाही गहरी नींद में सो गए। इसके बाद वासुदेव जी रात के अंधेरे और तेज बारिश में नन्हें कृष्ण को सुरक्षित गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के घर छोड़ आए। बाद में इसी बालक ने कंस का अंत करके दुनिया को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।

जन्माष्टमी पर किए जाने वाले खास अनुष्ठान
जन्माष्टमी का पर्व हर उम्र के लोगों के लिए खास होता है। इस दिन भक्त दिन भर उपवास रखकर भजन-कीर्तन करते हैं। मंदिरों और चौराहों पर बच्चों द्वारा कान्हा के जीवन से जुड़ी रासलीलाएं और नाटक प्रस्तुत किए जाते हैं।

इस दिन भगवान कृष्ण को खुश करने के लिए दूध, माखन, मेवे और खोये से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। साथ ही, कान्हा की सीख और जीवन के सही अर्थ को समझने के लिए लोग भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ भी बड़े चाव से सुनते हैं।
 

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