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सिंह संक्रांति पर सूर्य पूजा के साथ ही अवश्य करें घी का सेवन, जानें महत्व व शुभ मुहूर्त

सिंह संक्रांति पर सूर्य देव कर्क से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के अपनी ही राशि यानी सिंह में आ जाने से इस दिन सिंह संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।

 

यह तो हम जानते ही हैं कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है और इस महीने उनकी विशेष पूजा होती है वहीं इस माह में सूर्य पूजा का भी महत्व है इसीलिए इस दौरान आने वाली सूर्य संक्रांति यानी सिंह संक्रांति को भी महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है। 

सूर्य देव हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं और इसीको संक्रांति के नाम से जाना जाता है। जिस राशि में सूर्य प्रवेश करते हैं उसी के अनुसार संक्रांति का नामकरण होता है। अब सूर्य कर्क से निकलकर सिंह राशि में जा रहे हैं तो इस संक्रांति को सिंह संक्रांति कहते हैं। 

यह तो हम जानते ही हैं कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है और इस महीने उनकी विशेष पूजा होती है वहीं इस माह में सूर्य पूजा का भी महत्व है इसीलिए इस दौरान आने वाली सूर्य संक्रांति यानी सिंह संक्रांति को भी महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है। 

कब है सिंह संक्रांति 

इस बार सिंह संक्रांति का पर्व 17 अगस्त मंगलवार को मनाया जाएगा। 

सिंह संक्रान्ति पुण्य काल –सुबह 05:51 से 12:25 तक
अवधि – 06 घण्टे 34 मिनट

सिंह संक्रान्ति महा पुण्य काल – 05:51 से 08:02 तक
अवधि – 02 घण्टे 11 मिनट्स

सिंह संक्रान्ति का क्षण – 01:32 बजे

surya puja

सिंह संक्रांति का महत्व 

सिंह संक्रांति पर सूर्य देव कर्क से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के अपनी ही राशि यानी सिंह में आ जाने से इस दिन सिंह संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। खुद की राशि में आने से सूर्य का असर और भी बढ़ जाएगा। ज्योतिष के मुताबिक सूर्य आत्माकारक ग्रह है। सूर्य का प्रभाव बढ़ने से रोग खत्म होने लगते हैं और आत्मविश्वास बढ़ने लगता है। सिंह राशि में स्थित सूर्य की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है। लगभग 1 महीने के इस समय में रोज सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए।

वैसे तो सिंह संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है पर कोरोना के मद्देनजर ऐसा न करना ही ठीक है तो आप घर में भी नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इसके बाद दान-पुण्य करें। सिंह संक्रांति के दिन भगवान विष्णु, सूर्यदेव और भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है। 


सूर्य के साथ करें नरसिंह भगवान की पूजा 

सिंह संक्रांति पर सूर्य देव के साथ ही नरसिंह भगवान की पूजा भी की जाती है। इस दिन भक्त पवित्र स्नान करते हैं। उसके बाद गंगाजल, नारियल पानी और दूध से देवताओं का अभिषेक किया जाता है। नरसिंह भगवान के मंदिरों में दर्शन के लिए भी भक्त जाते हैं और पुण्यफल प्राप्त करते हैं। 

surya puja special

सिंह संक्रांति पर घी का महत्व 

सिंह संक्रांति पर जितना महत्व सूर्य पूजन का है उतना ही इस दिन घी के सेवन का भी महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन घी जरूर खाना चाहिए। चरक संहिता के मुताबिक गाय के घी को शुद्ध एवं पवित्र माना गया है। कहा जाता है कि सिंह संक्रांति पर घी का सेवन करने से यादाश्त, बुद्धि, बलवीर्य, ऊर्जा और ओज बढ़ता है। इसके अलावा गाय का घी खाने से वात, कफ और पित्त दोष दूर रहते हैं और शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इस समय गाय का घी खाने से रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

मान्यता के अनुसार इस दिन जो गाय का घी नहीं खाता उसे अगले जन्म में गनेल यानी घोंघे के रूप में जन्म लेना पड़ता है। यही कारण है कि इस दिन घी का सेवन फायदेमंद बताया गया है। घी के सेवन से राहु और केतु के बुरे प्रभाव से भी बचा जा सकता है।

इस दिन सूर्य पूजा के साथ ही सूर्य मंत्र- ऊँ नमो सूर्याय नम: का जाप करते रहें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें।