Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2026: 4 जून को है संकष्टी चतुर्थी, भगवान गणेश की पूजा के लिए नोट कर लें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
पुरुषोत्तम मास के दुर्लभ संयोग में इस साल 4 जून 2026 को विभुवन संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। अभिजीत और विजय मुहूर्त के विशेष योग के बीच विघ्नहर्ता श्रीगणेश की आराधना से हर संकट दूर होगा। पूरी खबर पढ़ें...
4 जून को विभुवन संकष्टी चतुर्थी
अधिक मास का विशेष दुर्लभ संयोग
अभिजीत और विजय मुहूर्त का साथ
रात 10:43 बजे होगा चंद्रोदय
दोपहर में रहेगा अशुभ राहुकाल समय
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: पुरुषोत्तम मास में बना अभिजीत और विजय मुहूर्त का महासंयोग, जानें राहुकाल व पूजा समय
विघ्न विनाशन और संकटों को हरने वाले भगवान श्रीगणेश की आराधना को समर्पित 'विभुवन संकष्टी चतुर्थी' का पावन पर्व इस साल 4 जून 2026, दिन गुरुवार को श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। धार्मिक दृष्टिकोण से इस चतुर्थी को बेहद अनूठा और अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि यह पावन तिथि पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के कृष्ण पक्ष में आ रही है।

तीनों लोकों के स्वामी 'विभुवन गणेश' की होगी विशेष पूजा
इस विशेष दिन पर भगवान गणेश के 'विभुवन' रूप की पूरे विधि-विधान से आराधना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, विभुवन गणेश का तात्पर्य उस दिव्य रूप से है जो ब्रह्मांड के तीनों लोकों यानी स्वर्ग लोक, पृथ्वी लोक और पाताल लोक में एक समान रूप से विद्यमान रहते हैं। अधिक मास में पड़ने के कारण इस व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
जानिए उदयातिथि और चंद्रोदय का सटीक समय
पंचांग गणना के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 3 जून 2026 की रात 9 बजकर 21 मिनट से हो जाएगी, जो अगले दिन 4 जून की रात 11 बजकर 30 मिनट तक मान्य रहेगी। सनातन धर्म में उदयातिथि की प्रधानता होने के कारण 4 जून को ही पूरे दिन चतुर्थी का मान होगा।
गुरुवार, 4 जून को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 16 मिनट पर निर्धारित है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण चंद्रोदय का समय रात 10 बजकर 43 मिनट पर रहेगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन यानी 5 जून की सुबह 8 बजकर 17 मिनट पर होगा। इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, जो 5 जून की सुबह 3 बजकर 41 मिनट तक चलेगा। वहीं सुबह 9 बजकर 3 मिनट तक शुक्ल योग रहेगा, जिसके बाद ब्रह्म योग की शुरुआत होगी।
अभिजीत और विजय मुहूर्त का महासंयोग
इस वर्ष विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर कई दुर्लभ और शुभ मुहूर्तों का खास संयोग बन रहा है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त एक साथ पड़ रहे हैं, जिन्हें किसी भी नए या मांगलिक कार्य को शुरू करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
दिन के प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 2 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 38 मिनट से 3 बजकर 34 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 35 मिनट तक
अमृत काल: रात 8 बजकर 34 मिनट से 10 बजकर 21 मिनट तक
भूलकर भी न करें राहुकाल में शुभ कार्य
शास्त्रों के नियमों के अनुसार, जहाँ शुभ मुहूर्तों में पूजा-अर्चना का अक्षय फल मिलता है, वहीं अशुभ समय में किसी भी नए काम की शुरुआत वर्जित होती है। 4 जून को दोपहर 2 बजकर 4 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 48 मिनट तक राहुकाल रहेगा।
इसके अतिरिक्त सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 7 बजकर 7 मिनट तक यमगंड काल रहेगा। गुलिक काल सुबह 8 बजकर 51 मिनट से 10 बजकर 35 मिनट तक और दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 1 मिनट से 10 बजकर 56 मिनट तक रहने वाला है। धर्म शास्त्रों की मान्यता के अनुसार, इन अशुभ काल खंडों के दौरान किसी भी प्रकार के नवीन अथवा मांगलिक कार्यों का शुभारंभ करने से बचना चाहिए।
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