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नियामताबाद क्षेत्र के अलग-अलग गांव में छठव्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ
छठ घाटों पर श्रद्धालुओं का जत्था दोपहर से ही पहुंचने लगा था और शाम तक वहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। कई लोगों ने घरों की छतों पर अस्थाई तालाब , तो कोई घर के बाहर हीं गड्ढा बनाकर अर्घ्य दिया ।
 

मनोवांछित फल प्राप्ति की की प्रार्थना के लिए छट पूजा

पहले दिन के अर्घ की पूजा हुयी संपन्न


चंदौली जिला के नियमाताबाद क्षेत्र के चंदाईत, सिकंदरपुर, कठौरी, बरौली, रोहणा, धपरी, रेमां, नियमताबाद, पांडेपुर, शिवनाथपुर, बुधवारे, बौरी, भरछां आदि गांव में छठ घाटों पर रविवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को श्रद्धालुओं ने छठ का पहला अर्घ्य दिया। 

Chhath Puja 2022


बता दें कि छठ घाटों पर श्रद्धालुओं का जत्था दोपहर से ही पहुंचने लगा था और शाम तक वहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। कई लोगों ने घरों की छतों पर अस्थाई तालाब , तो कोई घर के बाहर हीं गड्ढा बनाकर अर्घ्य दिया ।उल्लेखनीय है कि सूर्योपासना का महापर्व छठ कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। इस वर्ष छठ पर्व की शुरुआत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ हुई। शनिवार को व्रतियों ने ‘खरना’ का प्रसाद ग्रहण किया और रविवार को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया गया। 


वही व्रती ग्राम प्रधान कठौरी रंजना कुमारी, हर्षबाला चौबे, प्रभावती पाण्डेय, सीमा सिंह, प्रिया सिंह, वंदना सिंह, अभिलाषा सिंह ने कहां कि छठ में समर्पण का भाव साफ दिखता है। यह धरती पर रहने वाले समस्त जीवों की भलाई के लिए है। छठ व्रत में हर कोई समर्पित रहता है। इसके लिए किसी को कहने की जरूरत नहीं होती। कोई रास्तों की सफाई करके तो कोई घाट की तैयारी में अपना योगदान देता है। सब चाहते हैं कि व्रती को दिक्कत न हो। चाहे खरना की तैयारी हो या फिर घाट पर अर्घ्य देने की बात, सबमें लोग तन-मन से जुटते हैं।

Chhath Puja 2022

 पंडित पद्माकर चौबे ने बताया कि भगवान सूर्य साक्षात शक्ति के रूप हैं और एकमात्र देवता हैं जो प्रत्यक्ष दिखाई देते हैं। इस पर्व में गजब का सद्भाव दिखता है। क्या हिंदू क्या मुस्लिम... कोई भेदभाव नहीं। मुस्लिम महिलाएं चूल्हा बनाती हैं तो उसे हिन्दू समुदाय उपयोग करता है। इस पर्व में धर्म की दीवारें टूट जाती हैं। मैं कई मुस्लिम परिवारों को जानता हूं जो इस व्रत को करते हैं। पूरी आस्था के साथ प्रसाद का ग्रहण करते हैं।पंडित पद्माकर चौबे ने बताया कि मार्कण्डेय पुराण में छठी मैयां को प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी और ब्रह्मा की मानस पुत्री बताया गया है। पुराण में कहा गया है कि प्रकृति ने अपनी सारी शक्ति को छ: भागों में विभाजित की है। उनका छठा और सबसे मूल भाग छठी मैया हैं। इनके पास प्रकृति की उर्वरा शक्ति निहित है। छठी मैय्या के पूजन से संतान की प्राप्ति होती है और संतानों के जीवन में सुख-सौभाग्य आता है। इसलिए शिशु के जन्म के छठे दिन, छठी मैय्या का पूजन किया जाता है।

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