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एसी खराबी की शिकायत के बाद पांच बार चैन पुलिंग कर हंगामा करने लगे यात्री, काफी देर चला बवाल
कामाख्या भगत की कोठी एक्सप्रेस के यात्री अचानक चेन पुलिंग करके उस समय हंगामा करने लगे, जब ट्रेन का एसी काम न करने की शिकायत के बावजूद किसी रेल कर्मचारी ने शिकायत दूर नहीं की।
 

चंदौली जिले  के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर ट्रेन संख्या 15624 कामाख्या भगत की कोठी एक्सप्रेस के यात्री अचानक चेन पुलिंग करके उस समय हंगामा करने लगे, जब ट्रेन का एसी काम न करने की शिकायत के बावजूद किसी रेल कर्मचारी ने शिकायत दूर नहीं की। हंगामे की सूचना मिलते ही मौके पर जीआरपी व रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और मामले का संज्ञान लिया। 

कामाख्या भगत की कोठी एक्सप्रेस के यात्रियों का आरोप था कि कामाख्या स्टेशन से ट्रेन खुलने के दौरान से ही कोच संख्या A1 का एसी खराब चल रहा था, जिसकी शिकायत के बाद भी रेलवे का कोई भी कर्मचारी या अधिकारी संज्ञान लेने नहीं पहुंचा। यात्रियों के द्वारा एसीपी कर ट्रेन रोके जाने के दौरान लगभग डेढ़ घंटे तक ट्रेन प्लेटफार्म और आउटर के बीच अटकी रही।


हंगामा कर रहे यात्रियों ने शिकायत करते हुए बताया कि कामाख्या स्टेशन से खुलने के दौरान से ही कोच संख्या A1 का एसी खराब है। जिसकी शिकायत बेगूसराय, बरौनी और पटना में की गई। इसके बाद भी रेलवे द्वारा किसी भी कर्मचारी अधिकारी को भेजकर हमारी परेशानी की सुध नहीं ली गई। यात्रियों का आरोप है कि इस बेतहाशा गर्मी में राहत के लिए ही हमने एसी कोच में अपना टिकट कराया है। लेकिन पूरा पैसा देने के बाद भी हमें एसी खराब होने के कारण काफी परेशानियां झेलनी पड़ी। शिकायत के बावजूद भी जब हमारी बात नहीं सुनी गई तब मजबूरन ट्रेन को इस तरह से रोकना पड़ा। इस दौरान यात्रियों ने चार से पांच बार चैन पुलिंग करके ट्रेन को स्टेशन पर ही रोक दिया।

Kamakhya Bhagat Ki kothi


लगातार चैन पुलिंग करने से ट्रेन आधा प्लेटफार्म और आधा आउटर पर जा पहुंची। लगभग डेढ़ घंटे तक जीआरपी और रेलवे के अधिकारियों और सुरक्षा बल द्वारा समझाने के बाद किसी प्रकार यात्री माने। 

कहा जा रहा है कि इस दौरान ट्रेन की एसी की मरम्मत किए जाने के साथ ही एक अन्य टेक्नीशियन को भी साथ में भेजा गया ताकि आगे किसी भी प्रकार की समस्या हो उसे जल्द से जल्द सुधारा जा सके। हालांकि ट्रेन में पहले से ही दो टेक्नीशियन मौजूद थे, लेकिन उन्होंने इस समस्या का कोई समाधान नहीं किया।