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मुहर्रम के चालीसवें पर निकला दुलदुल और ताजिया का जुलूस
जिले में मुहर्रम के चालीसवें पर रविवार को इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की याद में मिल्कीयाना से अलम, ताबूत, दुलदुल और ताजिया का जुलूस उठाया गया। यह मोहम्मद इब्राहिम इमामबाड़ा से उठकर अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ कर्बला पहुंचा।
 

चंदौली जिले में मुहर्रम के चालीसवें पर रविवार को इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की याद में मिल्कीयाना से अलम, ताबूत, दुलदुल और ताजिया का जुलूस उठाया गया। यह मोहम्मद इब्राहिम इमामबाड़ा से उठकर अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ कर्बला पहुंचा। शांति व सुरक्षा-व्यवस्था के मद्देनजर कड़े बंदोबस्त किए गए थे। इस दौरान मुगलसराय के दुलहीपुर में थानों से फोर्स के साथ साथ चौकी इंचार्ज मिर्जा रिजवान बेग व पीएसी जवान मुस्तैद रहे।

जुलूस उठने से पहले इमामबाड़े में मौलाना मोहम्मद अब्बास ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए कहा कि इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने दीन को बचाने के लिए आज से 1444 हिजरी पहले इराक के कर्बला शहर में अपनी जान राह-ए-खुदा पर कुर्बान कर दी थी। उनकी शहादत के बाद दुर्दांत आतंकी यजीद की सेना के कमांडर ने इमाम की मां बेटियों और बीमार बेटे को कैदी बना लिया। जंगलों, पहाड़ियों से उन्हें पैदल ही शाम होने तक कर्बला से लेकर आया। उन्हें कैद कर लिया जहां इमाम हुसैन की चार साल की बच्ची भी सख्ती की वजह से शहीद हो गयी। यहां से जब उन्हें रिहाई मिली तो वे सभी इमाम हुसैन का चेहल्लुम करने कर्बला पहुंचे। यह वाकया सुनकर इमामबाड़े में मौजूद लोगों की आंखों से अश्क बहने लगे।

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