जब सबको आवास बांट रही थी तो कैसे छूट रहा बुधवारे गांव, 2018 के बाद नहीं आया एक भी आवास
भाजपा सरकार पर झूठा प्रचार करने का आरोप
आवास योजना पर किया गया लंबा चौड़ा दावा
आखिर किसकी लापरवाही से चली गयी 2 जानें
मजदूर नेता अजय राय ने उठाए सवाल
चंदौली जिले के बुधवारे गांव में कच्चा घर गिरने से पिता-पुत्र की दर्दनाक मौत के बाद एआईपीएफ नेता अजय राय ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उचित मुआवजे की मांग की। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रधानमंत्री आवास योजना की वास्तविकता और सरकारी दावों की पोल खोलती है।

अजय राय ने कहा कि 2018 से अब तक चंदौली में पात्र गरीबों, अतिपिछड़ों, दलितों और आदिवासियों को आवास देने की योजना लागू ही नहीं की गई। जबकि भाजपा नेताओं के बयान आते रहते हैं कि ‘सभी को आवास मिल चुका है’। उन्होंने सवाल किया कि अगर सबको आवास मिल चुका है, तो फिर इस गांव में कच्चे घर गिरने से मौतें क्यों हो रही हैं।
सर्वे के बाद भी आवास से वंचित पात्र
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनाव से पहले पात्रों का सर्वे तो कराती है, लेकिन पात्रता सूची के अनुसार आवास आवंटन नहीं करती। नियामताबाद खंड विकास अधिकारी के हवाले से अजय राय ने कहा कि 2018 के बाद से यहां कोई नया आवास स्वीकृत नहीं हुआ। फिलहाल जो सर्वे चल रहा है, उसकी सूची में भी कई पात्र शामिल नहीं किए गए हैं। चंदौली जनपद से 64,212 पात्रों की सूची मांगी गई है, लेकिन यह वास्तविक संख्या से काफी कम है।
आपदा राहत में भी अनदेखी
अजय राय ने कहा कि बाढ़ और भारी बारिश से हर साल हजारों परिवारों के घर क्षतिग्रस्त होते हैं, लेकिन मुआवजा ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसा मिलता है। कई परिवार अब भी मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं, मगर सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

वनाधिकार और जमीन का मुद्दा
उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘सभी को छत’ देने के दावे पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब आदिवासी और मुसहर समुदाय के पास अपनी जमीन ही नहीं है, तो वे आवास किस जमीन पर बनाएंगे। सरकार वनाधिकार कानून लागू कराने में विफल रही है, जिससे ग्राम सभा की जमीन पर पात्रों को पट्टा नहीं मिल पा रहा है।
अजय राय ने सरकार से मांग की कि मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वास्तविक पात्रों को तुरंत लाभ पहुंचाया जाए। साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थायी समाधान की व्यवस्था की जाए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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