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'यह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, पूर्वजों की आस्था है'; अलीनगर के पुराना कब्रिस्तान को बचाने के लिए लामबंद हुआ मुस्लिम समाज

चंदौली के अलीनगर में सड़क चौड़ीकरण की वजह से सदियों पुराना कब्रिस्तान और कई धार्मिक स्थल प्रभावित हो रहे हैं। इसे लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी चिंताएं जताईं और एक जरूरी ज्ञापन सौंपा।

 
 

अलीनगर सड़क चौड़ीकरण से कब्रिस्तान प्रभावित

मुस्लिम समाज ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

पूर्वजों की अंतिम विश्राम स्थली बचाने की मांग

संविधान के अनुच्छेद 25 का दिया हवाला

प्रशासन ने दिया नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन

चंदौली जिले के अलीनगर बाजार में इन दिनों विकास की बयार बह रही है, लेकिन इसके साथ ही एक गंभीर चिंता भी सामने आई है। दरअसल, यहाँ प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना की जद में एक सदियों पुराना कब्रिस्तान और कई अन्य धार्मिक स्थल आ रहे हैं। इस बात को लेकर स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों में गहरी चिंता है। अपनी इसी समस्या को लेकर समाज का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी चंद्र मोहन से मिलने पहुंचा।

डीएम को सौंपा गया ज्ञापन
मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस सड़क चौड़ीकरण के कारण न केवल सदियों पुराना कब्रिस्तान प्रभावित हो रहा है, बल्कि इमाम चौक, मज़ार और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि इन सभी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता या व्यवस्था निकाली जाए।

आस्था और संविधान का दिया हवाला
सौंपे गए ज्ञापन में लोगों ने भावुक होते हुए कहा कि यह कब्रिस्तान उनके लिए महज जमीन का कोई साधारण टुकड़ा नहीं है। यहाँ उनकी कई पीढ़ियों के पूर्वजों की अंतिम विश्राम स्थली है। यह जगह उनके इतिहास, परंपरा और गहरी धार्मिक आस्था से जुड़ी है। इसके साथ ही उन्होंने देश के संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 का हवाला देते हुए याद दिलाया कि हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और अपने धार्मिक स्थलों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।

जनता ने की संवेदनशीलता की मांग
स्थानीय नागरिक मो. रईस ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि विकास कार्य देश और इलाके की तरक्की के लिए बहुत जरूरी हैं और वे इसका विरोध नहीं कर रहे हैं। लेकिन, विकास के साथ-साथ हमारी धार्मिक धरोहरों की पवित्रता और हमारे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस बेहद संवेदनशील मामले में सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ कोई बीच का रास्ता निकालने की अपील की है।

मुस्लिम समाज ने रखी यह मांग
समुदाय की ओर से प्रशासन के सामने यह मांग रखी गई है कि कब्रिस्तान के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे जितना हो सके सुरक्षित रखा जाए। अगर किसी बेहद जरूरी वजह से जमीन का कुछ हिस्सा परियोजना में आता भी है, तो स्थानीय लोगों के साथ बैठकर बातचीत की जाए। इसके बदले में पास ही कोई दूसरी बड़ी जमीन दी जाए। साथ ही इमाम चौक और मजारों को पूरे सम्मान के साथ दूसरी जगह स्थापित करने की पक्की व्यवस्था की जाए। फिलहाल, प्रशासन ने ज्ञापन लेकर नियमों के मुताबिक कार्रवाई का भरोसा दिया है।

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