नारियल काटने वाले हथियार से हमला करते हैं मनबढ़ ठेले वाले, मुगलसराय में बीती रात आया ताजा मामला
धारदार हथियार से हमले के बाद मुगलसराय में बवाल
हमले से कार का अगला शीशा टूटा
बवाल बढ़ने की सूचना के बाद तुरंत मौके पर पहुँचे सीओ और कोतवाल
चंदौली जिले की मुगलसराय कोतवाली के बाहर मंगलवार की देर शाम अधिवक्ता मोहम्मद इस्लाम खान और उनके परिवार पर फल विक्रेताओं ने हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि अधिवक्ता अपनी पत्नी तबस्सुम, बड़ी बेटी फिजा और पुत्र सुहेल के साथ खरीदारी कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान कोतवाली गेट के बाहर फल खरीदते समय मामूली विवाद हुआ और देखते ही देखते कई ठेला-खोमचे वाले मौके पर जुट गए। विवाद इतना बढ़ गया कि अधिवक्ता और उनके परिजनों के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। हमलावरों ने अधिवक्ता की कार में भी तोड़फोड़ की और उनके सामान की छीना-झपटी कर दी।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची तो हमलावर फरार हो गए, हालांकि पुलिस ने एक युवक को हिरासत में ले लिया। पीड़ित अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि हमला करने वालों ने उनके परिवार को गंभीर चोटें पहुंचाई हैं और उनकी गाड़ी को भी काफी नुकसान पहुंचाया गया है।
घटना के बाद पुलिस हरकत में आई और तत्काल कोतवाली के बाहर लगे सभी ठेला-खोमचे हटवाकर राहत की सास ली। कोतवाल गगन राज सिंह ने बताया कि अधिवक्ता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

इसी बीच यह मामला पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करता है। सूत्रों का कहना है कि कोतवाली परिसर में तैनात कई पुलिसकर्मी अकसर वहीं लगे खोमचों से नारियल पानी और अन्य सामान मंगवाते रहते थे। कुछ दिन पहले का एक किस्सा भी चर्चा में है जब एक कथित भाजपा नेता कोतवाली में कुर्सी पर पैर रखकर बैठा और पीआरडी जवान से दो नारियल पानी मंगवाए। एक नारियल का पानी उसने स्वयं पीया और दूसरा इंस्पेक्टर के नाम से दुकानदार से मंगवाया। शाम को जब दुकानदार ने इंस्पेक्टर से पैसे मांगे तो वह भौंचक्का रह गया। सीसीटीवी देखने पर पूरा सच सामने आया और दुकानदार को नुकसान का पैसा इंस्पेक्टर को अपनी जेब से भरना पड़ा। बताया जाता है कि आज भी वह इंस्पेक्टर उस शख्स की तलाश कर रहा है।

ऐसे ही मामलों में अलीनगर के तत्कालीन इंस्पेक्टर शेषधर पांडे का उदाहरण दिया जाता है। उन्होंने उस व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की थी। कई बड़े नेताओं के फोन और दबाव के बावजूद इंस्पेक्टर पांडे ने कानून से समझौता नहीं किया और उस व्यक्ति को रात भर थाने में बैठाए रखा। उनकी सख्ती से उस समय पुलिस की ईमानदार छवि मजबूत हुई थी।

फिलहाल मुगलसराय की इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की भूमिका और कोतवाली के बाहर लंबे समय से चल रहे अतिक्रमण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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