'हर घर जल' योजना पर सवाल: मुगलसराय विधानसभा के महाबलपुर में कई महीने से मिल रहा दूषित पानी
चंदौली के महाबलपुर में 'हर घर जल' योजना दम तोड़ रही है। पिछले छह माह से ट्यूबवेल से दूषित और बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही है। ग्रामीणों की बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन मौन है।
महाबलपुर व्यासपुर पेयजल योजना विवाद
चंदौली में दूषित जलापूर्ति समस्या
हर घर जल योजना की असफलता
ट्यूबवेल से गंदा पानी आने का मामला
प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीणों में आक्रोश
सरकार द्वारा चलायी जा रही 'हर घर जल' योजना का उद्देश्य प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना है, लेकिन चंदौली जिले के मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र के महाबलपुर गांव में यह योजना पूरी तरह विफल साबित हो रही है। यहाँ व्यासपुर पेयजल योजना के तहत लगे ट्यूबवेल नंबर-1 से पिछले छह महीनों से लगातार दूषित और बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही है। गंदे पानी की समस्या से क्षेत्रवासी न केवल परेशान हैं, बल्कि अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता में हैं।
शिकायतों के बाद भी विभाग है उदासीन
ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल आपूर्ति में आ रही इस गंभीर समस्या की जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है। स्थानीय निवासी डॉ. हरिहर सिंह ने तो इस बाबत मुख्यमंत्री पोर्टल, जिलाधिकारी के व्हाट्सएप नंबर और सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर शिकायतें दर्ज कराई हैं। बावजूद इसके, जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को लेकर पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। अधिकारियों की यह लापरवाही क्षेत्रवासियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है।
संक्रामक रोगों का बढ़ा खतरा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ट्यूबवेल से जो पानी घरों तक पहुँच रहा है, वह न केवल बदबूदार है बल्कि उसका रंग भी काफी गहरा और गंदा है। जयकुमार गुप्ता, गुड्डू, ओमप्रकाश और अनीसा सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि मजबूरन इसी दूषित पानी का इस्तेमाल करने के कारण क्षेत्र में संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, पानी की शुद्धता की जांच किए बिना आपूर्ति जारी रखना एक बड़ी स्वास्थ्य आपदा को न्योता देना है।
प्रशासनिक अनदेखी पर गहरा आक्रोश
क्षेत्रवासियों का कहना है कि हाल के दिनों में देश के अन्य हिस्सों में दूषित पानी से जुड़ी भयावह घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन चंदौली का विभाग इन हादसों से कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से ट्यूबवेल नंबर-1 की जांच की जाए और जलापूर्ति को दुरुस्त कर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। सरकार के दावों और धरातल की हकीकत में दिख रहा यह अंतर, योजना के क्रियान्वयन पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
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