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ठेंगे पर है DM का आदेश : नियामताबाद में महीने भर से जली है मोटर, कागजों में सिमटा संपूर्ण समाधान दिवस का आदेश

चंदौली के नियामताबाद में जल निगम की मोटर एक महीने से खराब है। जिलाधिकारी से शिकायत के बाद भी 10 हजार की आबादी प्यासी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अधिकारी केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं और जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ।

 
 

एक महीने से ठप पेयजल आपूर्ति

डीएम की नाराजगी के बाद भी लापरवाही

10 हजार की आबादी पानी को परेशान

बीडीओ रूबेन शर्मा के दावों की पोल

कुएं और हैंडपंप के भरोसे ग्रामीण

 चंदौली जिले में सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ नियामताबाद विकास खंड के स्थानीय गांवों में पिछले एक महीने से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं। आलम यह है कि खुद जिलाधिकारी (DM) के निर्देश के बावजूद मातहत अधिकारियों ने समस्या के समाधान की जहमत नहीं उठाई।

10 हजार की आबादी प्यासी, मोटर एक माह से खराब
विकास खंड क्षेत्र के स्थानीय गांव स्थित जल निगम की पाइपलाइन से नियामताबाद, सिरसी, नदेसर, लाखापुर और मड़ई जैसे 5 प्रमुख गांवों की जलापूर्ति की जाती है। इन गांवों की कुल आबादी करीब 10 हजार है। पिछले एक महीने से जल निगम की मोटर जली हुई है, जिसके कारण आपूर्ति ठप हो गई है। कड़ाके की ठंड और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ग्रामीण अब कुओं, हैंडपंपों या फिर महंगे प्राइवेट सबमर्शिबल पंपों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।

समाधान दिवस में शिकायत के बाद भी नहीं मिला न्याय
ग्रामीणों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से उच्च अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई। अधिवक्ता सुधीर सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने 'संपूर्ण समाधान दिवस' में जिलाधिकारी से मुलाकात कर पत्र सौंपा था। डीएम ने तत्काल समाधान के निर्देश दिए थे, लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन की प्राथमिकता वाले समाधान दिवस का मजाक उड़ाया जा रहा है।

बीडीओ साहब के कागजी घोड़े: केवल आदेश, कार्रवाई शून्य
इस मामले में जब खंड विकास अधिकारी (BDO) रूबेन शर्मा से सवाल किया गया, तो उनका जवाब बेहद औपचारिक रहा। उन्होंने स्वीकार किया कि समाधान दिवस पर शिकायत पत्र मिला था, जिसे ग्राम पंचायत अधिकारी को अग्रसारित कर दिया गया है। हालांकि, आदेश देने के बाद बीडीओ साहब ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि मोटर ठीक हुई या नहीं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी केवल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर समय काट रहे हैं, जबकि जनता पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है।

आक्रोश की राह पर ग्रामीण
नियामताबाद के निवासियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे तहसील मुख्यालय का घेराव करेंगे। पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए महीनों तक इंतजार करना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह है कि क्या उच्चाधिकारियों के डंडे के बाद इस जली हुई मोटर को बदला जाता है या 10 हजार लोग इसी तरह पानी के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

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