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'ब्राह्मणों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं': चंदौली में परशुराम जन्मोत्सव के मंच से नेताओं की हुंकार

चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में आयोजित परशुराम जन्मोत्सव में प्रदेश भर के ब्राह्मण नेताओं ने जुटकर समाज की उपेक्षा पर गहरी चिंता जताई। सभी ने ब्राह्मण समाज की एकजुटता और स्वाभिमान का संकल्प लिया।

 
 

परशुराम जन्मोत्सव में ब्राह्मणों की एकजुटता

ब्राह्मणों की उपेक्षा पर नेताओं का आक्रोश

सनातन संस्कृति और ब्राह्मण समाज की शक्ति

राजनीतिक दलों पर ब्राह्मण नेताओं का प्रहार

मंदिर के पुजारियों को मानदेय देने की मांग

चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर स्थित केंद्रीय विद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर प्रदेश के दिग्गज ब्राह्मण नेताओं का जमावड़ा हुआ। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल भगवान परशुराम के प्रति आस्था व्यक्त की गई, बल्कि ब्राह्मण समाज की वर्तमान राजनीतिक उपेक्षा को लेकर एक कड़ा संदेश भी दिया गया। मंच से सभी वक्ताओं ने समाज की एकजुटता पर बल देते हुए स्वाभिमान की रक्षा का संकल्प लिया।

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सनातन और परशुराम जी की प्रेरणा
राष्ट्रीय परशुराम परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील भनाला ने भगवान परशुराम के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब आतातायी राजाओं ने समाज में तांडव मचाया, तब भगवान विष्णु ने परशुराम का छठा अवतार लेकर अधर्म का संहार किया। उन्होंने परशुराम जी से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों के जीर्णोद्धार की आवश्यकता पर जोर दिया। राजनीतिक दलों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के मुद्दों को लोकसभा में उठाने के लिए मैंने ब्राह्मण नेताओं को सामग्री दी थी, लेकिन दुखद है कि कोई भी नेता सदन में अपने समाज की बात नहीं रख सका।

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सनातन की मजबूती और पुजारियों का सम्मान
पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र ने सनातन संस्कृति को मजबूत करने के लिए ठोस सुझाव दिए। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश के सभी मंदिरों के पुजारियों को मानदेय दिया जाना चाहिए ताकि उनका सम्मान सुरक्षित रहे। साथ ही उन्होंने उर्दू के स्थान पर संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा देने और इसे राष्ट्रीय भाषा घोषित करने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ब्राह्मण अपने स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं करता; टूटना स्वीकार है, लेकिन झुकना मंजूर नहीं।

वोट बैंक की राजनीति पर तीखे सवाल
प्रयागराज के पूर्व विधायक डॉ. उदयभान करवरिया ने राजनेताओं को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जो भी नेता वोट मांगने आए, उससे यूजीसी (UGC) के फैसलों पर जवाब जरूर मांगें। जो काम कर चुके हैं उन्हें समर्थन दें, लेकिन जिन्होंने ब्राह्मण समाज की अनदेखी की है, उन्हें खाली हाथ लौटा दें। उन्होंने आरक्षण के विरोध और समाज को संगठित होकर सरल रहने की सलाह दी।

अपराध और न्यायपालिका पर सवाल
गोरखपुर के पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने ब्राह्मणों के प्रति भेदभाव पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में बिना अपराध सिद्ध हुए ब्राह्मणों के साथ एनकाउंटर जैसी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने सरकार से पिछले नौ वर्षों के दौरान हुए ऐसे एनकाउंटर पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज जिस राजनीतिक दल के साथ रहा है, उसकी सत्ता बनी है। जिस दिन ब्राह्मण एकजुट हो गया, उस दिन राजनीतिक भूचाल आना तय है।

इस गरिमामयी कार्यक्रम की अध्यक्षता सदानंद दुबे ने की, जबकि संचालन श्री राम द्विवेदी, शैलेंद्र पांडे और आलोक पांडे ने संयुक्त रूप से किया। इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. के.एन. पांडे, सूर्यमणि तिवारी और संजय पांडे सहित पूरी टीम की अहम भूमिका रही।

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