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शक और मोबाइल बन रहे रिश्तों के दुश्मन: टूटने की कगार पर पहुंचे 88% परिवारों को पुलिस ने फिर से मिलाया

चंदौली में मोबाइल और आपसी शक के कारण टूटते रिश्तों को महिला थाना प्रभारी पूजा कौर ने नई जिंदगी दी है। पिछले तीन महीनों में 88% जोड़ों को सुलह कराकर घर भेजा गया। जानिए कैसे पुलिस की संवेदनशीलता बचा रही है बिखरते परिवार।

 
 

मोबाइल और आपसी शक बना कलह का कारण

महिला थाना प्रभारी पूजा कौर की सफल काउंसलिंग

94 दिनों में 225 शिकायतों का हुआ निस्तारण

88 प्रतिशत जोड़ों ने फिर से शुरू किया नया जीवन

एफआईआर से पहले सुलह-समझौते को प्राथमिकता

डिजिटल खबर: टूटने की कगार पर थे रिश्ते, चंदौली महिला थाने की 'सकारात्मक पहल' से 88% जोड़ों का हुआ पुनर्मिलन
चंदौली: आधुनिक दौर में जहां छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते टूट रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से रिश्तों को सहेजने वाली एक सुखद तस्वीर सामने आई है। चंदौली महिला थाने में इन दिनों पारिवारिक कलह के मामलों की बाढ़ सी आ गई है, लेकिन थाना प्रभारी पूजा कौर और उनकी टीम की संवेदनशीलता की वजह से उजड़ते हुए घर फिर से बस रहे हैं।

मोबाइल और शक बन रहे विवाद की जड़
महिला थाने में आने वाली शिकायतों के विश्लेषण से एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। वर्तमान में पति-पत्नी के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह 'मोबाइल' और 'आपसी शक' है। थाना प्रभारी पूजा कौर ने बताया कि अधिकांश मामलों में अहंकार और संवाद की कमी के कारण बात तलाक तक पहुंच जाती है। लोग शादी के कुछ महीनों बाद ही या फिर 5-6 साल साथ रहने के बाद छोटी बातों को लेकर थाने पहुंच रहे हैं।

काउंसलिंग की मेहनत ला रही है रंग
पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल के कड़े निर्देशों के तहत, महिला थाना टीम किसी भी मामले में सीधे एफआईआर दर्ज करने के बजाय 'सुलह-समझौते' के सिद्धांत पर काम करती है। थाने में शिकायत आने पर दोनों पक्षों के साथ उनके परिजनों को भी बुलाया जाता है। कई घंटों तक चलने वाली काउंसलिंग के दौरान दोनों को एक-दूसरे की अहमियत समझाई जाती है। पूजा कौर की टीम की इसी मेहनत का परिणाम है कि बीते तीन महीनों में 88 प्रतिशत से अधिक मामलों में जोड़ों ने फिर से साथ रहने का फैसला किया।

आंकड़ों में सफलता की कहानी
1 जनवरी 2026 से 4 अप्रैल 2026 के बीच के आंकड़े महिला पुलिस की सफलता की गवाही दे रहे हैं। इस अवधि के दौरान थाने में कुल 225 शिकायतें दर्ज की गईं। पुलिस की सकारात्मक काउंसलिंग के जरिए इनमें से 213 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया। पति-पत्नी के बीच मनमुटाव को खत्म कर उन्हें विदा किया गया। केवल कुछ ही गंभीर मामले ऐसे रहे, जिन्हें विधिक कार्यवाही के लिए न्यायालय भेजा गया।

महिला थाना प्रभारी पूजा कौर का मानना है कि अगर समय रहते परिवार के बीच सही संवाद कायम हो जाए, तो किसी भी रिश्ते को टूटने से बचाया जा सकता है। उनकी इस कार्यशैली और संवेदनशीलता की अब जिले भर में चर्चा हो रही है। लोग पुलिस के इस मानवीय चेहरे की सराहना कर रहे हैं, जो केवल डंडा चलाने में नहीं बल्कि समाज को जोड़ने में विश्वास रखता है।

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